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जयंती विशेष: अपने रिश्तेदार की नौकरी नहीं लगवा सके थे देश के पहले राष्ट्रपति, ऐसे जताया था अफसोस

Fri, 03 Dec 2021 03:04 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Fri, 03 Dec 2021 03:04 PM IST
सार

 डॉ. राजेंद्र प्रसाद के प्रपौत्र डॉ. अशोक कुमार ने बताया कि राजनीति में डॉ. राजेंद्र प्रसाद के आदर्श बहुत उच्च थे। सिफारिश आदि करना उन्हें कभी पसंद नहीं रहा।

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Dr. Rajendra prasad birth anniversary: 137 anniversary of First President of India Dr Rajendra Prasad
देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने रिश्तेदार को लिखी थी जवाबी चिट्ठी। - फोटो : अमर उजाला।

पूरे देश में आज प्रथम राष्ट्रपति भारत रत्न डॉ. राजेंद्र प्रसाद की 137वीं जयंती मनाई जा रही है। ऐसे में हम आपको उनकी एक खास कहानी बताने जा रहे हैं। इस कहानी को जानकर उनके व्यक्तित्व और स्वभाव को पहचाना जा सकता है। राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने अपने पद पर रहते हुए भी अपने एक रिश्तेदार को सरकारी नौकरी दिलाने में असमर्थता जता दी थी। जवाबी पत्र में अफसोस जताते हुए उन्होंने यह भी लिखा था कि इतने ऊंचे पद पर रहते हुए भी नौकरी के मामले में न तो खुद कुछ कर सकता हूं और न किसी और से करा सकता हूं।



 

Dr. Rajendra prasad birth anniversary: 137 anniversary of First President of India Dr Rajendra Prasad
भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद।(फाइल) - फोटो : अमर उजाला।

 19 अगस्त 1953 को डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने राष्ट्रपति भवन के लेटरहेड पर अपनी नजदीकी रिश्तेदार उमा देवी निवासी जीरादेई को जवाबी पत्र लिखा था। आशीर्वाद के साथ पत्र की शुरुआत करते हुए उन्होंने लिखा था- सरकार में नौकरी संबंधी नियम होते हैं और उन्हीं के अनुसार मंत्रियों को या अन्य अधिकारियों को भी चलना पड़ता है। नियम के विरुद्ध कोई नहीं जा सकता है। पढ़े-लिखे लोगों की संख्या काफी ज्यादा हो गई है, ऐसे में नौकरी मिलना कठिन हो गया है। बहाली करना मेरे अधिकार में नहीं है, और इसके लिए किसी से सिफारिश भी नहीं कर सकता। अफसोस जताते हुए उन्होंने आगे लिखा- इतनी ऊंची जगह रहते हुए भी नौकरी के मामले में कुछ नहीं कर सकता।

Dr. Rajendra prasad birth anniversary: 137 anniversary of First President of India Dr Rajendra Prasad
देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद द्वारा लिखी गई चिट्ठी। - फोटो : अमर उजाला।
हालांकि रेलवे की नौकरी का जिक्र करते हुए उन्होंने अपनी रिश्तेदार को लिखा था कि जिसके पास नियुक्ति का अधिकार है उस विभाग के अधिकारी के नाम दरखास्त भेज दें और उसमें इस बात का जिक्र अवश्य कर दें कि उनके पिता उसी विभाग में कार्यरत थे। वे उस दरखास्त को संबंधित अधिकारी को भेज देंगे।
 
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Dr. Rajendra prasad birth anniversary: 137 anniversary of First President of India Dr Rajendra Prasad
भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद - फोटो : Twitter
साथ ही उन्होंने यह बात भी लिखी थी कि इस बात को लेकर आश्वस्त नहीं कर सकते कि नियुक्ति हो ही जाएगी, लेकिन यह हो सकता है कि राष्ट्रपति भवन से पत्र जाने पर उस अधिकारी का ध्यान उस ओर चला जाए। पहले राष्ट्रपति की जयंती पर तीन दिसंबर को व्यापार मंडल के पदाधिकारी मनीष सक्सेना ने यह पत्र अमर उजाला को उपलब्ध कराया। उनको यह पत्र डॉ. राजेंद्र प्रसाद के एक करीबी रिश्तेदार ने उपलब्ध कराया था।
 
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Dr. Rajendra prasad birth anniversary: 137 anniversary of First President of India Dr Rajendra Prasad
भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद। (फाइल) - फोटो : अमर उजाला।

डॉ. राजेंद्र प्रसाद के प्रपौत्र डॉ. अशोक कुमार ने बताया कि राजनीति में डॉ. राजेंद्र प्रसाद के आदर्श बहुत उच्च थे। सिफारिश आदि करना उन्हें कभी पसंद नहीं रहा। उन्होंने अपने परिवार के किसी सदस्य के लिए पैरवी नहीं की। सरकारी नौकरी के दौरान नियम विरुद्ध काम करने के लिए अपने परिवार के एक सदस्य के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश भी कर दी थी।

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