पूरी दुनिया के लिए संकट बने कोरोना वायरस के बारे में भारतीय ज्योतिष विद्वानों ने पिछले ही साल चेतावनी दे दी थी। ऐसा ज्योतिषियों का दावा है कि भारत के हिंदू पंचांग में साफ-साफ लिखा है कि इस वर्ष किसी विषाणु जनित महामारी का प्रकोप होगा और वह सच भी साबित हुआ।
Coronavirus: ज्योतिष विद्वानों का दावा, इस समय तक मिल जाएगी दुनिया को 'कोरोना' से मुक्ति
29 मार्च के बाद स्थिति और भी खराब हो गई। ऐसा इसलिए क्योंकि बृहस्पति उच्च ग्रह होने के बाद भी शनि और मंगल के साथ संयोग कर रहा है। ये पूरे जनमानस के लिए खराब है। 15 अप्रैल के बाद संक्रमण में कमी आएगी। कोरोना का प्रकोप जून में समाप्त होगा। बृहस्पति जब पुन: अपने घर में जाएगा तभी कोरोना से निजात मिलेगी।
महामारी के कारण इन दोनों ग्रहों का सामीप्य ही है। 28 अप्रैल से यह पुन: व्रकी होकर धनु राशि की ओर वापस जाना प्रारंभ करेगा और पूर्ण रूप से 28 जून को प्रात: काल तीन बजकर पांच मिनट पर वापस धनु में चला जाएगा। अप्रैल महीने के बाद कुछ राहत मिलेगी लेकिन रोग से छुटकारा तो जून महीने के अंत में मिलेगी।
ज्योतिर्विद पंडित बृजेश पांडेय के अनुसार विक्रम संवत 2077 का राजा बुध तथा मंत्री चंद्रमा हैं। बुध का चंद्रमा शत्रु है। शनि इस वर्ष सप्तमेश एवं अष्टमेश होकर सप्तम भाव में बैठे हैं और लग्न पर पूर्ण दृष्टि पड़ रही है तथा राहू व्यय भाव में बैठे एवं केतु रोग स्थान पर हैं। जो वर्ष भर परेशानियों का सामना कराते हैं।
इन ग्रहों के आधार पर यह कोरोना वायरस एक महामारी जैसा ही है जो वर्ष पर्यंत कष्टकारी रहेगा। लेकिन मासिक गणना के अनुसार इस महामारी का प्रकोप 24 अप्रैल के बाद शांत होना शुरू हो जाएगा। 30 मई के बाद से पूर्ण रूप से शांत हो सकता है, लेकिन इसका असर पूरे वर्ष रहेगा।
पंडित डॉ. जोखन पांडे बताते हैं कि 25 मार्च से पहले जो भारतीय नव वर्ष था उसमें सूर्य में शनि की स्थिति थी। सूर्य राजा थे और शनि मंत्री थे। इस नव वर्ष के राजा बुध और मंत्री चंद्रमा, चंद्रमा औषधियों का स्वामी है। अत: 25 मार्च से अगले तीन महीने में कोरोना की औषधि मिल जाएगी।
25 अप्रैल तक ग्रह पूरी तरह से अपने घरों में जाकर मजबूत हो जाएंगे। सूर्य और शनि की युति ही थी जो उतरते-उतरते रोग महामारी, विषाणु देकर गई है। 25 अप्रैल के बाद स्थिति में सुधार होना शुरू हो जाएगा। 25 मई के बाद पूरी दुनिया को इस महामारी से मुक्ति मिल जाएगी। साथ ही दुनिया में भारत की मान प्रतिष्ठा भी बढ़ेगी।