मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गुरु ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ 1962 में पहली बार विधायक चुने गए थे। वह पांच बार मानीराम विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए। बाद में वह चार बार सांसद चुने गए थे। वहीं, योगी आदित्यनाथ अपने गुरु के उलट पहली बार सांसद का चुनाव लड़े और जीत गए। उसके बाद वह पांच बार सांसद चुने गए। 2017 में मुख्यमंत्री बनने पर वह विधानसभा का चुनाव लड़ने के बजाए उच्च सदन के सदस्य बने। पहली बार वह विधानसभा का चुनाव लड़े और भारी मतों से जीते हैं।
UP Election 2022: सीएम योगी पहले बने सांसद, अब विधायक, ऐसी है इनकी कहानी
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गोरखनाथ मंदिर का सियासत से बहुत पुराना रिश्ता है। गोरखनाथ मंदिर के पीठाधीश्वर रहे ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ ने मंदिर का सियासत से रिश्ता जोड़ा था। उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था। आजादी के आंदोलन में उन्हें जेल जाना पड़ा था।
देश की आजादी के बाद हुए पहले चुनाव में उन्होंने लोकसभा का चुनाव लड़ा था, पर वह हार गए। वह लगातार लोकसभा का चुनाव लड़ते रहे। जीत का स्वाद उन्हें 1967 में मिला पर उनका 1969 में निधन हो गया।
दिग्विजयनाथ के निधन के बाद ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ पीठाधीश्वर हो गए। वह गोरखपुर संसदीय क्षेत्र से चार बार सांसद चुने गए। रामजन्म भूमि आंदोलन से जुड़ने के साथ ही उन्होंने देश में छुआछूत के खिलाफ अभियान चलाया। 1998 में उन्होंने सियासत से नाता तोड़ लिया। उन्होंने अपनी सियासी कमान अपने प्रिय शिष्य योगी को सौंप दी।
योगी ने उसका बखूबी निर्वहन किया। वह लगातार पांच बार सांसद चुने गए। हर चुनाव में उनके जीत का अंतर बढ़ता गया। 2017 के विधानसभा में भाजपा की सफलता के बाद उन्हें प्रदेश का मुख्यमंत्री बना दिया गया। पांच साल तक उन्होंने अपने दायित्वों का निर्वहन अच्छी तरह से किया। विधानसभा चुनाव में खुद चुनाव लड़ने के लिए उन्होंने अपनी परंपरागत सीट को चुना। वह पहली बार विधानसभा का चुनाव लड़े और एक लाख के अंतर से जीत गए। उनके नेतृत्व में विधानसभा का चुनाव लड़ा गया। पार्टी ने दोबारा सत्ता में जोरदार वापसी की।