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सीएम योगी की शक्ति पूजा: गोरखनाथ मंदिर में कलश स्थापित करते हैं गोरक्षपीठाधीश्वर, खास तरीके से मनाते हैं नवरात्रि

Thu, 07 Oct 2021 02:24 AM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Thu, 07 Oct 2021 02:24 AM IST
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CM yogi celebrate Navratri 2021 in Gorakhnath temple
सीएम योगी आदित्यनाथ। (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला।

नवरात्रि में गोरक्षपीठाधीश्वर की शक्तियों की आराधना का विशेष महत्व होता है। गोरक्षपीठ का जो भी पीठाधीश्वर रहा है वह नौ दिन तक शक्ति की आराधना करते हैं। योगी आदित्यनाथ भी उसी परंपरा का निर्वहन कर रहे हैं। नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना करते हैं। इस बार भी बृहस्पतिवार को कलश स्थापित करेंगे। वह नौ दिन व्रत रहते हैं। सुबह-शाम शक्ति पीठ के पास दुर्गा सप्तसती का पाठ करते हैं।



गोरखनाथ मंदिर में पहले दिन की पूजा
नवरात्रि के पहले दिन मंदिर में भैरो की अक्षत, पुष्प, माला, धूप, अगरबत्ती से पूजा होती है, फिर सभी संत एक साथ मंदिर से निकलते हैं। गोरक्षपीठाधीश्वर के साथ संस्कृत विद्यालय के आचार्य, छात्र व मंदिर के कर्मचारी घंटा के साथ शोभायात्रा में शामिल होते हैं। शोभायात्रा मंदिर से निकलकर भीम सरोवर तक जाती है। भीम सरोवर सप्त मोक्ष दायिका जल मौजूद है। गोरक्षपीठाधीश्वर या मंदिर के मुख्य पुजारी कलश में जल भरते हैं।

वहां से शोभा यात्रा शक्ति पीठ पर आती है। पीठाधीश्वर गौरी-गणेश की पूजा करते हैं, फिर कलश स्थापित करते हैं। गोरखनाथ मंदिर के आचार्य अरविंद त्रिपाठी बताते हैं कि कलश स्थापना के बाद मंदिर में स्थापित मां भगवती की आराधना, मंदिर में स्थापित राम दरबार, कृष्ण दरबार की पूजा-अर्चना की जाती है। सप्तशती का पाठ होता है। सुबह-शाम पीठाधीश्वर भी सप्तशती का पाठ करते हैं। आगे की स्लाइड्स में पढ़ें पूरी खबर...

 

CM yogi celebrate Navratri 2021 in Gorakhnath temple
सीएम योगी आदित्यनाथ। - फोटो : अमर उजाला।

पहले नौ दिन एकांत में होती थी शक्ति पूजा
मुख्यमंत्री बनने से पहले गोरक्षपीठाधीश्वर नौ दिन शक्ति के पूजा- अर्चना के लिए व्रत रहते थे। एकांत में बैठकर शक्ति की आराधना करते थे। जब राष्ट्र व समाज की रक्षा परम आवश्यक हुई, तब परंपराओं को  भी तोड़ा है। शक्ति की उपासना में यह संदेश है कि मां भगवती के आठ हाथ हैं। यह हाथ शक्ति के प्रतीक हैं। सभी हाथों को मिला दें तो एकजुटता होगी और ताकत बढ़ेगी। इसका संदेश है कि एकजुटता से ही राष्ट्ररक्षा की जा सकती है। समाज की कुरीतियों को दूर किया जा सकता है। समाज को जोड़ना भी उपासना है।

CM yogi celebrate Navratri 2021 in Gorakhnath temple
सीएम योगी आदित्यनाथ। - फोटो : अमर उजाला।

नौ दिन होता है दुर्गा सप्तशती का पाठ
मंदिर में गुरु गोरखनाथ की आरती हर रोज सुबह तीन बजे प्रारंभ होती है। प्रात: चार बजे तक आरती समाप्त होती है। गुरु गोरखनाथ की आरती समाप्त होते ही दुर्गा सप्तशती का पाठ शुरू हो जाता है। पाठ के पश्चात पीठाधीश्वर सभी देवी, देवताओं का भोग लगाकर आरती करते हैं। अब पीठाधीश्वर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं। लखनऊ में रहते हैं तो उनकी जगह मंदिर के मुख्य पुजारी कमलनाथ पूजा-पाठ करते हैं। हालांकि लखनऊ में योगी की शक्तिपूजा जारी रहती है।

 

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CM yogi celebrate Navratri 2021 in Gorakhnath temple
सीएम योगी। - फोटो : अमर उजाला।

रेल दुर्घटना होने पर तोड़ दी थी मंदिर की परंपरा
एक अक्तूबर 2014 को गोरखपुर में नंदानगर रेलवे क्रासिंग पर रेल दुर्घटना हो गई थी। उस समय गोरक्षपीठाधीश्वर का शारदीय नवरात्र का व्रत चल रहा था। जैसी गोरक्ष पीठ की परंपरा रही है, उसके मुताबिक नवरात्र भर पीठाधीश्वर शक्ति पूजा करते हैं। मंदिर के ऊपरी हिस्से में कलश स्थापित होता है, वहीं पीठाधीश्वर भी रहते हैं लेकिन दुर्घटना के मामले में ऐसा नहीं हुआ। सूचना मिलते ही योगी ने परंपरा तोड़ दी। घटनास्थल पर पहुंच गए। उस दुर्घटना में 12 लोगों की  मौत हो गई थी। बहुत से लोग घायल हो गए थे। योगी पहुंचे तो सुबह से लेकर देर शाम तक घायलों की देखभाल के इंतजाम में लगे रहे। तत्कालीन रेल मंत्री सदानंद गौड़ा प्लेन से गोरखपुर आए और योगी के साथ घायलों से रेलवे अस्पताल से लेकर एयरफोर्स हास्पिटल तक जाकर मिले थे।

 

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CM yogi celebrate Navratri 2021 in Gorakhnath temple
सीएम योगी। - फोटो : अमर उजाला।

अष्टमी पर महानिशा पूजा
जिस दिन रात्रिकाल में अष्टमी का योग होता है उसी दिन गोरखनाथ मंदिर में रात्रि को महानिशा की पूजा होती है। उसी समय हवन किया जाता है। इसके लिए नवरात्रि के पहले दिन बेदी पर जौ को बोया जाता हे। उसमें सात और अन्न होता है। अष्टमी के दिन पूजन कर के अन्न को काटा जाता है। उसी जई से मंदिर में स्थापित सभी देवी देवताओं की पूजा होती है।

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