नवरात्रि में गोरक्षपीठाधीश्वर की शक्तियों की आराधना का विशेष महत्व होता है। गोरक्षपीठ का जो भी पीठाधीश्वर रहा है वह नौ दिन तक शक्ति की आराधना करते हैं। योगी आदित्यनाथ भी उसी परंपरा का निर्वहन कर रहे हैं। नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना करते हैं। इस बार भी बृहस्पतिवार को कलश स्थापित करेंगे। वह नौ दिन व्रत रहते हैं। सुबह-शाम शक्ति पीठ के पास दुर्गा सप्तसती का पाठ करते हैं।
सीएम योगी की शक्ति पूजा: गोरखनाथ मंदिर में कलश स्थापित करते हैं गोरक्षपीठाधीश्वर, खास तरीके से मनाते हैं नवरात्रि
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पहले नौ दिन एकांत में होती थी शक्ति पूजा
मुख्यमंत्री बनने से पहले गोरक्षपीठाधीश्वर नौ दिन शक्ति के पूजा- अर्चना के लिए व्रत रहते थे। एकांत में बैठकर शक्ति की आराधना करते थे। जब राष्ट्र व समाज की रक्षा परम आवश्यक हुई, तब परंपराओं को भी तोड़ा है। शक्ति की उपासना में यह संदेश है कि मां भगवती के आठ हाथ हैं। यह हाथ शक्ति के प्रतीक हैं। सभी हाथों को मिला दें तो एकजुटता होगी और ताकत बढ़ेगी। इसका संदेश है कि एकजुटता से ही राष्ट्ररक्षा की जा सकती है। समाज की कुरीतियों को दूर किया जा सकता है। समाज को जोड़ना भी उपासना है।
नौ दिन होता है दुर्गा सप्तशती का पाठ
मंदिर में गुरु गोरखनाथ की आरती हर रोज सुबह तीन बजे प्रारंभ होती है। प्रात: चार बजे तक आरती समाप्त होती है। गुरु गोरखनाथ की आरती समाप्त होते ही दुर्गा सप्तशती का पाठ शुरू हो जाता है। पाठ के पश्चात पीठाधीश्वर सभी देवी, देवताओं का भोग लगाकर आरती करते हैं। अब पीठाधीश्वर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं। लखनऊ में रहते हैं तो उनकी जगह मंदिर के मुख्य पुजारी कमलनाथ पूजा-पाठ करते हैं। हालांकि लखनऊ में योगी की शक्तिपूजा जारी रहती है।
रेल दुर्घटना होने पर तोड़ दी थी मंदिर की परंपरा
एक अक्तूबर 2014 को गोरखपुर में नंदानगर रेलवे क्रासिंग पर रेल दुर्घटना हो गई थी। उस समय गोरक्षपीठाधीश्वर का शारदीय नवरात्र का व्रत चल रहा था। जैसी गोरक्ष पीठ की परंपरा रही है, उसके मुताबिक नवरात्र भर पीठाधीश्वर शक्ति पूजा करते हैं। मंदिर के ऊपरी हिस्से में कलश स्थापित होता है, वहीं पीठाधीश्वर भी रहते हैं लेकिन दुर्घटना के मामले में ऐसा नहीं हुआ। सूचना मिलते ही योगी ने परंपरा तोड़ दी। घटनास्थल पर पहुंच गए। उस दुर्घटना में 12 लोगों की मौत हो गई थी। बहुत से लोग घायल हो गए थे। योगी पहुंचे तो सुबह से लेकर देर शाम तक घायलों की देखभाल के इंतजाम में लगे रहे। तत्कालीन रेल मंत्री सदानंद गौड़ा प्लेन से गोरखपुर आए और योगी के साथ घायलों से रेलवे अस्पताल से लेकर एयरफोर्स हास्पिटल तक जाकर मिले थे।
अष्टमी पर महानिशा पूजा
जिस दिन रात्रिकाल में अष्टमी का योग होता है उसी दिन गोरखनाथ मंदिर में रात्रि को महानिशा की पूजा होती है। उसी समय हवन किया जाता है। इसके लिए नवरात्रि के पहले दिन बेदी पर जौ को बोया जाता हे। उसमें सात और अन्न होता है। अष्टमी के दिन पूजन कर के अन्न को काटा जाता है। उसी जई से मंदिर में स्थापित सभी देवी देवताओं की पूजा होती है।