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तस्वीरें: गोरखपुर के इस थाने में 22 पुलिसकर्मियों को जला दिया था जिंदा, लोगों ने ऐसे लिया था मौत का बदला

Tue, 22 Jun 2021 04:22 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Tue, 22 Jun 2021 04:22 PM IST
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Chauri Chaura kand special History story from Gorakhpur
चौरीचौरा घटना। - फोटो : अमर उजाला।

आज हम आपको उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले की ऐसी कहानी बताने जा रहे हैं, जिसे सुनकर आप हैरान हो जाएंगे। यह कहानी आजादी से पहले की है। यहां चौरीचौरा में जनविद्रोह से ब्रिटिश हुकूमत हिल उठी थी। लोगों के आक्रोश को भांपते हुए गोरखपुर के तत्कालीन कमिश्नर ने इंडिया होम दिल्ली को तार भेजकर एक कंपनी मिलिट्री भेजने की मांग की थी। वहीं सरकार के गृह विभाग दिल्ली ने सभी स्थानीय सरकारों और प्रशासन को तार भेजकर हवाई फायरिंग पर तत्काल रोक लगाने को कहा था।



उत्तर प्रदेश राजकीय अभिलेखागार की ओर से इससे संबंधित दस्तावेज के मुताबिक, आठ फरवरी 1921 को गांधी जी पहली बार गोरखपुर आए। इसके बाद यहां से बड़ी संख्या में लोग उनके असहयोग आंदोलन से जुड़ने लगे। जिले के कांग्रेसी उस समय अपने को 'राष्ट्रीय कार्यकर्ता' कहते थे। आंदोलन से प्रभावित लोगों ने सरकार की शराब की दुकानों का बहिष्कार कर दिया। साथ ही अंग्रेजों को उनके राजस्व का एक प्रमुख जरिया ताड़ी (ताड़ के पेड़ से प्राप्त होने वाला रस) देना बंद कर दिया। बड़ी संख्या में लोग आयातित वस्त्रों को छोड़कर गांधी टोपी और खादी के कपड़ों का इस्तेमाल करने लगे। आगे की स्लाइड्स में पढ़ें पूरी खबर...

 

Chauri Chaura kand special History story from Gorakhpur
इसी चौरीचौरा पुलिस थाने को लगा दी गई थी आग। (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला।

भारत में इस आंदोलन से उत्पन्न हुई स्थिति को संभालने के लिए ब्रिटिश सरकार ने 'प्रिंस ऑफ वेल्स' को भारत भेजा, लेकिन विरोध स्वरूप आंदोलन ने और गति पकड़ ली। अकेले गोरखपुर शहर से करीब 15 हजार स्वयंसेवक सूचीबद्ध हुए। इसी आंदोलन के क्रम में चर्चा में आया तत्कालीन गोरखपुर-देवरिया की कच्ची रोड पर स्थित परगना दक्षिण हवेली के टप्पा केतउली का गांव चौरीचौरा।

स्वयं सेवकों की पिटाई से शुरू हुआ जन विद्रोह
गांधी जी के गोरखपुर आने के लगभग एक साल बाद आंदोलन के क्रम में एक फरवरी 1922 को चौरीचौरा से सटे मुंडेरा बाजार में शांतिपूर्ण बहिष्कार किया जा रहा था। इसी बीच चौरीचौरा पुलिस स्टेशन के पास एक सब इंस्पेक्टर ने कुछ स्वयंसेवकों की पिटाई कर दी। चार फरवरी 1922 को जिला मुख्यालय से करीब 15 मील दूर पूर्व डुमरी नामक स्थान पर बड़ी संख्या में स्वयंसेवक इकट्ठा हुए और स्थानीय नेताओं के संबोधन के बाद चौरीचौरा थाने पहुंच गए।

Chauri Chaura kand special History story from Gorakhpur
चौरीचौरा घटना। (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला

यहां पुलिस से पिटाई का स्पष्टीकरण मांगने लगे। इसी दौरान पुलिस ने गोली चला दी। गोलियां कब तक चलीं इसकी कोई जानकारी नहीं है लेकिन इसके परिणामस्वरूप 26 लोगों की मौत हो गई। गोलियां खत्म होने पर सभी पुलिसकर्मी थाने के अंदर भाग गए। आक्रोशित स्वयंसेवकों ने उन्हें बाहर आने की चेतावनी दी, लेकिन पुलिसकर्मी बाहर नहीं आए। साथियों की मौत से आक्रोशित स्वयंसेवकों ने गेट को बंद कर थाने को आग लगा दी। इस घटना में एक सब इंस्पेक्टर और 22 पुलिस कर्मियों की जलकर मौत हो गई। मात्र एक चौकीदार जिंदा बचा।

 

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Chauri Chaura kand special History story from Gorakhpur
चौरीचौरा घटना। (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
सात फरवरी को चौरीचौरा की घटना की सूचना यूपी के डीआईजी को भेजी गई
घटना की पूरी तफ्तीश के बाद गोरखपुर के सुप्रीटेंडेंट ऑफ पुलिस ने सात फरवरी को चौरीचौरा की घटना की सूचना डीआईजी सीआईडी यूपी को भेजी। उस समय के समाचारपत्र 'लीडर' में सात फरवरी को चौरीचौरा की घटना के बाद सरकार द्वारा की गई कार्रवाई के विषय में सूचना प्रकाशित की गई थी। इसके बाद इसकी सूचना दिल्ली मुख्यालय को दी गई। सूचना से मुख्यालय में हड़कंप मच गया। गृह विभाग दिल्ली की ओर से स्थानीय सरकारों और प्रशासन को तार भेजा।
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Chauri Chaura kand special History story from Gorakhpur
चौरीचौरा घटना। (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला।

तार के दस्तावेज के अनुसार, संयुक्त प्रांत की सरकार द्वारा जारी आदेश के अनुसार सभी जिलों के अधिकारियों को निर्देश दिया जाता है कि वे हवाई फायरिंग न करें और अपने अधीनस्थों को भी इसे करने से रोकें। घटना के बाद गोरखपुर के कमिश्नर ने इंडिया होम दिल्ली को तार भेजकर चौरीचौरा की घटना की जानकारी दी। अवगत कराया कि करीब दो हजार स्वयंसेवकों और ग्रामीणों की संगठित भीड़ ने चौरीचौरा थाने पर हमला किया और थाना भवन को जला दिया गया। साथ ही यह भी अवगत कराया कि स्थिति अत्यंत ही गंभीर है और गोरखपुर के लिए एक कंपनी मिलिट्री भेज दी जाए।

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