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बड़ी खबर: देश के दो तिहाई ओटीटी ग्राहक छोटे शहरों और कस्बों से, चौथाई आबादी तक पहुंचा डिजिटल माध्यम

Thu, 02 Sep 2021 10:40 AM IST
Pankaj Shukla पंकज शुक्ल
Updated Thu, 02 Sep 2021 10:40 AM IST
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new survey report breaks myth of ott market major contribution is from outside the big metro cities
ओटीटी प्लेटफॉर्म - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

देश में ओटीटी कारोबार को लेकर आई एक नई रिपोर्ट ने इस कारोबार में कूदी कंपनियों की आंखें खोल दी हैं। इस साल मई से लेकर जुलाई के बीच कराए गए इस सर्वे से साफ हो चुका है कि ओटीटी का कारोबार मेट्रो शहरों में ही होने के हिसाब से अपनी योजनाएं बनाए बैठे दिग्गज ओटीटी खिलाड़ियों की मार्केटिंग टीमों का अब तक का विश्लेषण बेकार साबित हो चुका है। ओटीटी पर फिल्में और वेब सीरीज देखने वाले दर्शकों का बड़ा वर्ग अब छोटे शहरों और कस्बों में है और मेट्रो शहरों का ओटीटी कारोबार में योगदान सिर्फ एक तिहाई ही बचा है। ओटीटी के अधिकतर नए ग्राहक अब उन शहरों व कस्बों से आ रहे हैं जहां इंटरनेट की पहुंच हाल के दिनों में तेजी से बढ़ी है।

 

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ओटीटी प्लेटफॉर्म - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

ओटीटी का कारोबार करने वालों और इस पर मनोरंजन सामग्री देखने वालों के बीच किया गया ये अब तक का सबसे बड़ा सर्वे बताया जा रहा है। इस रिपोर्ट के लिए इसे जारी करने वाली कंपनी ने शहरी और ग्रामीण उपभोक्तों में से करीब 12 हजार लोगों को इस सर्वे में शामिल किया और इसकी शुरूआत देश में कोरोना की दूसरी लहर के कमजोर होने के ठीक बाद की। इस सर्वे के मुताबिक देश की कुल आबादी के करीब एक चौथाई लोग ओटीटी का प्रयोग करने लगे हैं और करीब 35 करोड़ 32 लाख लोग ऐसे हैं जिन्होंने एक महीने की अवधि में कम से कम एक बार ऑनलाइन वीडियो जरूर देखा। इसका मतलब है कि देश की 25.3 फीसदी आबादी तक ओटीटी कारोबार पहुंच चुका है।

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ओटीटी प्लेटफॉर्म - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

रिपोर्ट का सबसे अहम हिस्सा है उन ग्राहकों की संख्या पता चलने का जो पैसा देकर ओटीटी पर मनोरंजन सामग्री देखते हैं। इसके मुताबिक सर्वे अवधि में देश में करीब चार करोड़ लोगों ने पैसा देकर ओटीटी पर मनोरंजन सामग्री देखी। इनके पास अलग अलग ओटीटी के करीब 9 करोड़ 60 लाख सदस्यताएं हैं। यानी पैसे देकर सामग्री देखे वाले हर ओटीटी दर्शक ने दो से अधिक ऐप्स की नियमित सदस्यता ले रखी है और जो हर महीने अपना सब्सक्रिप्शन रीन्यू कराते रहे। पैसा देकर ओटीटी सामग्री देखने वालों में 66 फीसदी लोग पुरुष हैं यानी ओटीटी सामग्री देखने में लिंग भेद का अंतर भी बहुत बड़ा नहीं है।

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ओटीटी प्लेटफॉर्म - फोटो : फाइल फोटो

ओटीटी देखने वालों के बीच मई से लेकर जुलाई 2021 के बीच हुए सर्वे की सबसे चौंकाने वाली बात है कि इस कारोबार में देश के सबसे बड़े छह शहरों में रहने वालों की भागीदारी सिर्फ 11 फीसदी ही है। नेटफ्लिक्स, प्राइम वीडियो, सोनी लिव और एमएक्स प्लेयर जैसी दिग्गज कंपनियों का अब तक ये ही मानना रहा है कि मेट्रो शहरों में ग्राहकों की संख्या ही उनका कारोबार चलाने के लिए पर्याप्त है। लेकिन, इस रिपोर्ट से ये भ्रम टूटा है।

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ओटीटी प्लेटफॉर्म - फोटो : फाइल फोटो

देश के छह बड़े शहरों से रिपोर्ट के अनुसार सिर्फ एक तिहाई ही ग्राहक ओटीटी को ऐसे मिल रहे हैं जो नियमित भुगतान करते हैं। इनमें भी बेंगलुरू पहले नंबर पर है। उसके बाद दिल्ली का नंबर आता है और मुंबई के ग्राहक अब भी तीसरे नंबर पर हैं। मुंबई की गिनती देश के उन शहरों में पहले से होती रही है जहां पाइरेटेड कंटेंट की खपत सबसे ज्यादा है।

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