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Vishnu Puran: समुद्र मंथन में सबसे पहले निकला हलाहल विष, माता 'लक्ष्मी' के लिए छिड़ा देवताओं और दानवों में युद्ध
विष्णु पुराण (Vishnu Puran) में अब तक आपने देखा समुद्र मंथन करने के लिए मंदराचल पर्वत को मथानी एवं नागराज वासुकि को नेती बनाया गया। देवताओं और दैत्यों ने अपना मतभेद भुलाकर मंथन आरंभ किया। समुद्र मंथन के परिणाम स्वरूप जो चौदह मूल्यवान वस्तुएं प्राप्त हुई थीं, उनमें से हलाहल (कालकूट) विष सबसे पहले निकला था।
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विष्णु पुराण
- फोटो : सोशल मीडिया
कालकूट विष की ज्वाला बहुत तीव्र थी। हलाहल विष की ज्वाला से सभी देवता तथा दैत्य जलने लगते हैं। धरती पर हाहाकार मच जाता है। सभी देवता मिलकर भगवान शंकर की आराधना करते हैं तब भगवान शिव अपने भक्तों की रक्षा के लिए कालकूट विष का पान करते हैं। इसी विष के प्रभाव से शिव का कंठ नीला पड़ा, इसीलिए उन्हें 'नीलकंठ' के नाम से भी जाना जाने लगा।
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विष्णु पुराण
- फोटो : सोशल मीडिया
दोबारा मंथन आरंभ होता है। इस बार समुद्र से लक्ष्मी रूपी नारी निकलती हैं जो स्वयं लक्ष्मी का अवतार थीं। इस नारी को ब्रह्मा ने सागर पुत्री का नाम दिया। इस सुंदर स्त्री के लिए देवता और दानवों में युद्ध होने लगा। फिर सागर पुत्री के रूप में जन्मीं माता लक्ष्मी ब्रह्मा के पास इसका समाधान मांगने जाती हैं।
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विष्णु पुराण
- फोटो : सोशल मीडिया
इस तरह ब्रह्मा देवताओं और दानवों को याद दिलाते हैं कि नारी पर उसकी इच्छा के बिना कोई अधिकार नहीं जमा सकता। अपने लिए किसी को स्वीकार और अस्वीकार करने का निर्णय केवल नारी का है। इस तरह ब्रह्मा ने सागर पुत्री के लिए स्वयंवर प्रथा की शुरुआत की यानी अपनी इच्छा से अपना वर चुनने का अधिकार दिया।
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विष्णु पुराण
- फोटो : ट्विटर
तब से ही माना जाता है कि जिस भी घर में स्त्री का सम्मान होता है, वहां समृद्धि कायम रहती है। अब सागर पुत्री के रूप में जन्मीं लक्ष्मी किसका चुनाव करती हैं इसे देखने के लिए तो आपको अगले एपिसोड का इंतजार करना होगा। बता दें महाभारत में कृष्ण का रोल निभाने वाले नीतीश भारद्वाज ने विष्णु पुराण में भगवान विष्णु का किरदार निभाया था। वैदेही अमृते ने इस सीरियल में माता लक्ष्मी का किरदार निभाया था।
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