कोरोना वायरस के चलते इन दिनों पूरा देश लॉकडाउन है। कोई भी व्यक्ति अपने घर से बाहर नहीं निकल पा रहा है। ऐसे में कई दिनों तक बैठे- बैठे लोग उक्ता गए थे। लोगों के लिए दिनभर समय बिताना मुश्किल साबित हो रहा था। जिसे देखते हुए दूरदर्शन ने पहले करते हुए 90 के दशक के सबसे चर्चित और पसंदीदा सीरियल 'रामायण' का प्रसारण एक बार फिर से करने की ठानी। इसी के बाद से रामायण को लेकर कई सवाल किए जाने लगे। इसी दौरान लोगों के बीच 'विक्रम-बेताल' भी चर्चा का विषय बन गया।
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Vikram Aur Betaal
- फोटो : file photo
दरअसल रामायण के दोबारा प्रसारण ने दूरदर्शन की टीवी पर टीआरपी के ने आयामों को रच दिया। जिसकी वजह से रामायण को लेकर एक सवाल उठा कि रामायण को जब कोई प्रोड्यूसर नहीं मिल रहे थे तो ये सीरियल उस समय कैसे बना? इस सवाल का जवाब सामने आया 'विक्रम और बेताल' के रूप में। दरअसल टेलीविजन पर रामायण के बनने से भी पहले से रामानंद सागर ने इसके लिए पैसा इकट्ठा करने के लिए विक्रम और बेताल का निर्माण किया। जिससे मिले पैसे से रामायण बनाया गया।
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सज्जन लाल पुरोहित
- फोटो : Social Media
विक्रम और बेताल की बात की जाए तो इस टीवी सीरियल में विक्रम का किरदार अरुण गोविल ने निभाया था। जो आगे चलकर टेलीविजन के श्रीराम बने। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस सीरियल में 'बेताल' का किरदार किसने निभाया था? विक्रम और बेताल में बेताल का किरदार निभाया था जाने माने अभिनेता सज्जन लाल पुरोहित ने। सज्जन लाल पुरोहित ने टीवी पर आमद देने से पहले ही कई सारी फिल्मों में अभिनय किया हुआ था। उन्होंने बेताल के किरदार में भी जान फूंक दी थी।
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सज्जन लाल पुरोहित
- फोटो : Social Media
सज्जन लाल पुरोहित पेशे से तो वकील थे। लेकिन अदाकारी उनका पैशन का। सज्जन ने देश की आजादी के पहले से ही फिल्मों में अभिनय करना शुरू कर दिया था। सज्जन ने विक्रम और बेताल में काम करने से पहले रामानंद सागर की फिल्म आंखें में उनके साथ काम किया था। इस फिल्म के बाद से ही सज्जन की अदाकारी रामानंद सागर के जेहन में बस गई थी। जब रामानंद सागर के मन में विक्रम और बेताल का ख्याल आया तब उन्होंने बेताल के किरदार के लिए सज्जन को चुना। सज्जन ने भी देर ना करते हुए सीधे हां कह दिया।
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विक्रम और बेताल
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विक्रम और बेताल सीरियल में बेताल का डायलॉग 'तू बोला, तो मैं चला जा रहा हूं। मैं तो चला!' आज बी लोगों को मुंह जुबानी याद है। सज्जन ने इस सीरियल को करने से पहले कई फिल्मों में काम किया था। जिनमें रेल का डिब्बा, चलती का नाम गाड़ी, झुमरू, बीज साद बाड और अप्रैल फूल शामिल थीं। सज्जन ला पुरोहित को कभी उनके पूरे नाम से नहीं पुकारा गया। उन्हें केवल सज्जन ही कहा जाता था। 17 मई 2000 को सज्जन का निधन हो गया था।