छोटे पर्दे की सबसे चर्चित और पसंदीदा हीरोइनों में से एक श्रीति झा आज अपना 35वां जन्मदिन मना रही हैं। श्रीति झा अपने करियर में मिल रही सफलता को काफी एंजॉय कर रही हैं। लेकिन ये कामयाबी उन्हें ऐसे ही नहीं मिली। इसके लिए उन्होंने कड़ा संघर्ष किया और लंबा सफर तय किया। तब कहीं जाकर उन्हें ये मुकाम हासिल हुआ है।
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श्रीति झा
- फोटो : Social media
श्रीति झा का नाम लेते ही 'कुमकुम भाग्य' की प्रज्ञा याद आ जाती है। उन्होंने इस किरदार को इतनी तपिश से निभाया कि लोग उन्हें अपने नाम से कम और प्रज्ञा के नाम से ज्यादा जानते हैं। श्रीति झा को आज घर-घर में पहचाना जाता हैं। उन्होंने अपनी एक अलग पहचान बना ली है। उन्होंने अपने जीवन में कुछ ऐसे फैसले लिए जिसने उनकी किस्मत पलट दी।
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श्रीति का जन्म 1986 में बिहार के बेगूसराय जिले में हुआ था, लेकिन उनका बचपन कोलकाता में गुजरा। वहां 10 साल बिताने के बाद श्रीति परिवार के साथ नेपाल के काठमांडू में रहने चली गईं और वहां से भी पढ़ाई की। इसके बाद श्रीति ने बीए अंग्रेजी की पढ़ाई दिल्ली के वेंकटे्श्वरा कॉलेज से की, जहां वे कॉलेज के अंग्रेजी ड्रामा सोसाइटी से जुड़ीं और आगे चल कर उसकी प्रेसिडेंट भी बनीं। बस यहीं से उनके सपनों को उड़ान मिली।
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दिल्ली में पढ़ाई के दौरान ही उन्हें पहले सीरियल 'धूम मचाओ धूम' के लिए चुन लिया गया था। श्रीति ने इस सीरियल में एक शर्मीली और अंधविश्वासी लड़की मालिनी शर्मा का किरदार निभाया था। 'धूम मचाओ धूम' के बाद उन्होंने 'जिया जले' सीरियल में काम किया। हालांकि, यह सीरियल ज्यादा दिन नहीं चला, लेकिन श्रीति को पहचान मिल गई थी। लोग उन्हें पसंद करने लगे थे। हर जगह उनकी काम की तारीफ होने लगी, जिसके कारण श्रीति को छोटे पर्दे पर काम मिलने लगा।
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इसके बाद श्रीति ने 'ज्योती' सीरियल में भी काम किया। इसमें उन्होंने सुधा का किरदार निभाया। सुधा एक ऐसी लड़की थी जिसे पर्सनैलिटी डिसॉर्डर की बीमारी थी। यानी दिन में वह सीधी साधी डरपोक सुधा बन कर रहती थी तो रात में ग्लैमरस, निडर देविका बनकर कहर ढाती थी। श्रीति ने सुधा के किरदार के लिए बहुत तारीफें बटोरीं।