लॉकडाउन जब से शुरू हुआ तब से टीवी पर पुराने कार्यक्रम का चलन बढ़ गया है। चैनलों के पास नए एपिसोड नहीं हैं ऐसे में उन्हें पुराने सीरियल से काम चलाना पड़ रहा है। सबसे पहले दूरदर्शन ने 'रामायण' और 'महाभारत' का प्रसारण शुरू किया। दर्शकों ने इन कार्यक्रमों को लेकर उत्साहजनक प्रतिक्रिया दिखाई। फिलहाल दूरदर्शन पर 80 और 90 के दशक के कई शोज दिखाए जा रहे हैं। आज हम यहां गुजरे जमाने के उन सीरियल्स की बात करने वाले हैं जो फैंटसी (कल्पना) पर आधारित शोज हैं। इन सीरियल की कहानियां जादू और तिलिस्म जैसे ट्रैक के इर्द गिर्द बुनी गईं थीं।
90 के दशक में इन फैंटसी शोज ने जमाई थी धाक, शो शुरू होते ही टीवी से चिपक जाते थे लोग
विक्रम और बेताल
सागर आर्ट्स के बैनर तले बना सीरियल 'विक्रम और बेताल' का प्रसारण 80 के दशक में हुआ। ये सीरियल राजा विक्रमादित्य की कहानी पर आधारित थी। इसमें मुख्य कलाकार अरुण गोविल, अरविंद त्रिवेदी, दीपिका चिखलिया, सुनील लहरी और विजय अरोड़ा थे। बाद में इसके ज्यादातर कलाकारों को रामानंद सागर ने 'रामायण' के लिए कास्ट किया था।
पोटली बाबा की
गुलजार के निर्देशन में सीरियल 'पोटली बाबा की' का प्रसारण साल 1991 में हुआ था। सीरियल का टाइटल ट्रैक 'आया रे बाबा' को गुलजार ने लिखा था। बच्चों के बीच ये गाना काफी मशहूर हुआ था। बच्चों के इस सीरियल में 'अली बाबा चालीस चोर' जैसी कई कहानियां दिखाई गईं थीं।
अलिफ लैला
सीरियल 'अलिफ लैला' का प्रसारण साल 1993 से 1997 के बीच किया गया। 'अलिफ लैला' 90 के दशक के मशहूर शो में से एक है। अरेबियन नाइट्स पर आधारित 'अलिफ लैला' का स्क्रीनप्ले रामानंद सागर ने लिखा था। इसका निर्देशन उनके तीन बेटों प्रेम सागर, आनंद सागर और मोती सागर ने किया था।
चंद्रकांता
1994- 96 में नीरजा गुलेरी सीरियल 'चंद्रकांता' लेकर आईं। सीरियल में शिखा स्वरूप, शाहबाज खान, मुकेश खन्ना, इरफान खान और पंकज धीर जैसे कलाकार थे। 'चंद्रकांता' सीरियल बाबू देवकीनंदन खत्री के इसी नाम के उपन्यास पर बना था। सीरियल में नौगढ़ और विजयगढ़ की कहानी दिखाई गई थी। नौगढ़ के राजकुमार कुंवर वीरेंद्र विक्रम, विजयगढ़ की राजकुमारी चंद्रकांता से प्यार करता था। सीरियल की कहानी मुख्यत: इन्हीं पर आधारित थी।
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