राम भक्त ले चला रे राम की निशानी....राम के वनवास के बाद जब भरत और राम का संवाद होता है उस वक्त ये गीत सभी को भावविभोर कर जाता है। भरत अपने शीश पर खड़ाऊं और आंख में आंसू लेकर निकल पड़ते हैं। यह तथ्य तो सब जानते हैं कि भरत ने अयोध्या के राजसिंहासन पर राम के स्थान पर कभी न बैठने का निश्चय किया था। उन्होंने राम की खड़ाऊ को उनके स्थान पर सुसज्जित कर राम के वापस आने तक अयोध्या का शासन चलाया था। इस दौरान उन्होंने कभी राजमहल में प्रवेश नहीं किया।
रामायण: रामभक्त 'भरत' संजय जोग जिसे भूल गई दुनिया, 40 की उम्र में लीवर फेल होने से हुई मौत
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
Published by: अपूर्वा राय
Updated Thu, 15 Jul 2021 11:02 AM IST
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