80 के दशक में प्रसारित सीरियल 'रामायण' में भगवान राम का रोल अभिनेता अरुण गोविल ने निभाया था। उस दौर में अरुण गोविल जहां कहीं भी जाते थे लोग उन्हें भगवान का रूप समझकर पूजा करने लगते थे। राम के किरदार से भले ही अरुण गोविल को लोकप्रियता मिली हो लेकिन इस किरदार की वजह से उन्हें काफी नुकसान भी उठाना पड़ा। इसका खुलासा उन्होंने हाल ही में एक इंटरव्यू में किया है।
'रामायण' में 'राम' का किरदार कर अभिनेता की हो गई थी ऐसी हालत, बोले- 'निर्माता कहते थे...'
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मुंबई मिरर से बातचीत में अरुण गोविल ने कहा कि 'मैंने अपने करियर की शुरुआत हिंदी फिल्मों में हीरो के तौर पर की थी। 'रामायण' के बाद जब वापस फिल्में करने गया तो निर्माता कहते थे कि राम के रूप में तुम्हारी छवि बन गई है। इसे तोड़ पाना बहुत मुश्किल है। तुम्हें कोई और रोल नहीं दे सकते।'
अरुण गोविल आगे कहते हैं कि 'निर्माताओं के मुताबिक मैं फिल्मों के हिसाब से फिट नहीं था। इससे मेरे करियर को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा। मुझे अहसास हो गया कि मैं अब रूपहले पर्दे पर उस तरह वापसी नहीं कर सकता, जैसा मैं चाहता हूं। जब भी कुछ नया करने जाता लोग मुझसे कहते, 'अरे रामजी क्या कर रहे हैं?' मैं काफी निराश हो गया था। मुझे इस शो से बहुत प्यार मिला लेकिन मेरा करियर रुक गया।'
अरुण गोविल ने कहा कि 'अभी मैं अभिनय से दूर हो गया हूं। पिछले 14 साल से कुछ छोटे-मोटे रोल को छोड़ दें तो कुछ खास काम नहीं किया। मैंने अभिनय पूरी तरह नहीं छोड़ी है। कुछ अच्छा मिलेगा तो काम करूंगा।' अरुण गोविल ने ये भी साफ किया कि वो बगैर काम के नहीं बैठे हैं, हां उन्होंने अभिनय से दूरी बना ली है।
अरुण गोविल ने खुलासा किया कि वो सीरियल में राम के लिए पहली पसंद नहीं थे। उन्होंने कहा कि 'रामायण' के ऑडिशन के बाद मैंने रामानंद सागर सर से राम के रोल के लिए निवेदन किया था। वो मुझे लक्ष्मण या भरत का रोल देने के लिए तैयार थे। राम का किरदार वो किसी और को दे चुके थे। मैंने दूसरा रोल करने से इंकार कर दिया था लेकिन एक दिन अचानक मेरे पास सागर सर का फोन आया और उन्होंने बताया कि राम का रोल मैं कर रहा हूं।'
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