सतीश कौशिक इंडस्ट्री के जाने-माने अभिनेता, निर्माता और निर्देशक थे। अपने अभिनय और निर्देशन से सतीश ने दर्शकों के दिल में खास जगह बनाई। स्क्रीन पर सतीश की मौजदूगी भर से फिल्म के सीन मजेदार हो जाता थे। बीते साल आज ही के दिन सतीश कौशिक ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया। आज सतीश की पहली पुण्यतिथि है। सतीश को उनके चाहने वाले आज नम आखों से याद कर रहे हैं। चलिए आपको अभिनेता के करियर और जीवन से जुड़े कुछ किस्से बताते हैं।
Satish Kaushik: सतीश को बचपन से ही था अभिनय का शौक, महमूद के सीन की प्रैक्टिस कर 'कैलेंडर' ने सीखी थी एक्टिंग
सतीश कौशिक का जन्म 13 अप्रैल 1956 को हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले में हुआ था। बचपन से ही सतीश कौशिक को फिल्में देखने का काफी शौक था। महमूद उनके फेवरेट एक्टर थे। वह महमूद के सीन की अपने घर में प्रैक्टिस किया करते थे। नौकरी की वजह से सतीश कौशिक के पिता दिल्ली शिफ्ट हो गए, जिसके बाद सतीश की पढ़ाई-लिखाई दिल्ली में ही हुई।
दिल्ली के किरोड़ीमल कॉलेज से ग्रेजुएशन के बाद सतीश ने नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में एडमिशन ले लिया। पढ़ाई पूरी करने के बाद वे मुंबई पहुंचे गए। सतीश ने फिल्म 'मासूम' में असिस्टेंट डायरेक्टर के रूप में काम किया। इस फिल्म में उन्होंने शेखर कपूर को असिस्ट किया था। इसके साथ ही फिल्म में उन्होंने एक छोटा सा किरदार भी निभाया था। साल 1987 में सतीश को 'मिस्टर इंडिया' में 'कैलेंडर' के किरदार से पहचान मिली। उनके इस किरदार को लोगों ने खूब पसंद किया था। इसके बाद उन्होंने कई मजेदार किरदार निभाए। इनमें 'राम-लखन' और 'साजन चले ससुराल' जैसी कई हिट फिल्में शामिल हैं।
अपने करियर में सतीश ने 100 से ज्यादा फिल्मों में काम किया और कईं फिल्मों का निर्देशन भी किया। निर्देशक के तौर पर सतीश की पहली फिल्म 'रूप की रानी चोरो का राजा' थी। हालांकि, यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कुछ खास कमाल नहीं दिखा सकी। इसके बाद उन्होंने कई और फिल्मों का निर्देशम भी किया। उन्होंने सलमान खान के साथ फिल्म 'तेरे नाम' बनाई, जो बॉक्स ऑफिस ब्लॉकबस्टर साबित हुई।
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सतीश कौशिक शानदार कलाकार होने के साथ-साथ एक बेहतरीन इंसान भी थे। वे हमेशा अपने दोस्तों के लिए खड़े होते रहे। जिसके कई किस्से मशहूर हैं। लेकिन 90 के दशक में उनके साथ एक ऐसा हादसा हुआ, जिसने उन्हें तोड़कर रख दिया था। सतीश कौशिक ने अपने बेटे सानू को महज दो वर्ष की उम्र खो दिया था, जिससे उन्हें गहरा सदमा लगा। इस सदमें से उबरने में सतीश को कई साल लगे। इसके 16 साल सतीश के घर उनकी बेटी वंशिका का जन्म हुआ।
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