Movie Review: उजड़ा चमन
कलाकार: सनी सिंह, मानवी गगरू, अतुल कुमार, शारिब हाशमी, करिश्मा शर्मा, सौरभ शुक्ला आदि।
निर्देशक: अभिषेक पाठक
निर्माता: कुमार मंगत और अभिषेक पाठक
हिंदी सिनेमा के मिस्टर भरोसेमंद कहलाने वाले अभिनेता अजय देवगन के मैनेजर कुमार मंगत ने कोई 10-11 साल पहले अपने बेटे और बेटी दोनों को फिल्म इंडस्ट्री में लाने की कोशिशें शुरू कीं। बेटी अमृता को उन्होंने फिल्म हाल ए दिल में हीरोइन बनाया और बेटे अभिषेक से बनवाई शॉर्ट फिल्म बूंद। बूंद ने सर्वश्रेष्ठ लघु फिल्म का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी जीत लिया। बेटी ने तीन चार फिल्में और की और गायक राघव सच्चर से शादी करके अभिनय को अलविदा कह दिया। अभिषेक अपने पिता के साथ फिल्में बनाते रहे, वितरित करते रहे और अब बन गए हैं निर्दशक, फिल्म उजड़ा चमन से।
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उजड़ा चमन
- फोटो : सोशल मीडिया
राज बी शेट्टी की लिखी कन्नड़ फिल्म ओंडू मोट्टेया काथे का हिंदी रीमेक है, उजड़ा चमन। दो साल पहले इस कन्नड़ फिल्म को अच्छी तारीफ मिली तो अभिषेक ने इसे हिंदी में बनाने का फैसला किया। उधर, स्त्री के हिट होते ही इसके निर्देशक अमर कौशिक ने बधाई हो के हिट हीरो आयुष्मान के साथ शुरू कर दी, बाला। दोनों फिल्में साथ साथ बनती रहीं और हफ्ते भर के अंतराल के साथ रिलीज भी हो रही हैं। लेकिन, उजड़ा चमन का चमन उजड़ता इसलिए दिख रहा है क्योंकि ये फिल्म सिर्फ फिल्म बनाने के लिए बनाई गई फिल्म दिखती है। एक अच्छी कहानी का इसके भोंडे संवादों और बेतरतीब निर्देशन ने बेड़ा गर्क करने में कसर नहीं छोड़ी है।
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उजड़ा चमन
- फोटो : सोशल मीडिया
फिल्म उजड़ा चमन के हीरो सनी सिंह टीवी से फिल्मों में आए हैं। साइड रोल करते करते उन्हें ये पहली लीड रोल वाली फिल्म मिली है। वह फिल्म में 30 साल के एक हिंदी प्राध्यापक है जिसे सिर पर बाल न होने की वजह से दिक्कत है। सुंदर दिखना जितना एक स्त्री का अधिकार है उतना ही एक पुरुष का भी, इस एक लाइन पर अगर ये फिल्म टिकी होती तो सुंदर फिल्म बन सकती थी। लेकिन, यहां जोर पुरुष के आकर्षक दिखने की जद्दोजहद पर कम बल्कि एक ज्योतिषी की गणना के मुताबिक जल्द से जल्द शादी कर लेने पर ज्यादा है। और, इसी अफरातफरी जैसी ही फिल्म बन गई है।
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उजड़ा चमन
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अभिषेक पाठक को सिनेमा विरासत में मिला है। सनी सिंह को एक लीड हीरो बनने की जल्दी है। और, दोनों ने अपना कम ठीक से इस चमन में किया नहीं है तो बॉक्स ऑफिस पर बहार आए भी तो भला कैसे? बाकी सारे कलाकारों को फिल्म के चलने, न चलने से कोई लेना देना नहीं है। फिल्म का पूरा का पूरा सेट अप ही अभिषेक पाठक के लिए एलियन है। कौन सा कॉलेज होगा ऐसा जहां लड़के भरी क्लास में अपने टीचर को टकला कहकर बुलाते होंगे। एक छात्रा का अपने अध्यापक से इसलिए फ्लर्ट करना भी अजीब लगता है कि वह पेपर लीक कर दे। सनी सिंह ने प्यार का पंचनामा और सोनू के टीटू की स्वीटी से जो कुछ कमाया था, वह सब इस फिल्म में गंवा दिया है। वह हिंदी सिनेमा के नए विनोद मेहरा बनते नजर आ रहे हैं, जो साइड हीरो में तो खूब जमते थे, लेकिन फिल्म का पूरा दारोमदार अपने कंधों पर आते ही हांफने लगते थे।
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उजड़ा चमन
- फोटो : सोशल मीडिया
कहानी, संवाद, अभिनय के अलावा फिल्म का संगीत भी इसकी कमजोर कड़ी है। एक भी गाना ऐसा नहीं है जो दर्शकों की जुबां पर चढ़ सके। गौरव रोशिन के औसत से कमजोर संगीत को सहारा देने गुरु रंधावा को भी लाया गया लेकिन आइटम गाने अब फिल्मों को हिट कराने में मदद नही करते। फिल्म का एक मात्र मजबूत पहलू सुधीर चौधरी की फोटोग्राफी मानी जा सकती है लेकिन दिल्ली को इससे भी बेहतर तरीके से पहले तमाम फिल्मों में दिखाया जा चुका है। कुमार मंगत का हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में बड़ा नाम है। उनकी अपनी फिल्म वितरण कंपनी है जिसके चलते वह किसी भी फिल्म की रिलीज डेट जितना चाहें आगे पीछे कर सकते हैं। ये मुकाम उन्होंने बड़ी मेहनत से पाया है। उम्मीद की जानी चाहिए कि पुत्र मोह में वह इस पर बट्टा नहीं लगाएंगे और अपनी अगली फिल्में बेहतर तैयारी के साथ बनाएंगे। अमर उजाला के मूवी रिव्यू में फिल्म उजड़ा चमन को मिलते हैं पांच में से डेढ़ स्टार।