Movie Review: मास्टर
कलाकार: विजय, विजय सेतुपति, मालविका मोहनन, शांतनु भाग्यराज, अर्जुन दास, एंड्रिया और नासर
पटकथा: लोकेश कंगराज, रत्ना कुमार, पॉन प्रतिभान
निर्देशक: लोकेश कंगराज
रेटिंग: ***
सिनेमा बदल रहा है। इसकी कहानियां बदल रही हैं और बदल रहा है इन कहानियों के नायकों का खुद को नायक बनाने का तरीका। अगर आपने आर माधवन की ‘मारा’ अब तक देख ली होगी तो आपको आने वाले दिनों के सिनेमा के नायक का अंदाजा लगना शुरू हो गया होगा। ‘मास्टर’ ने ‘मारा’ से दो कदम आगे बढ़कर दिखाया है। हीरो अब वही नहीं हो क्लाइमेक्स में सब कुछ खुद कर जाए। वह दूसरों को आगे बढ़ाने और फिर उनको आगे बढ़ते देखने में यकीन करता है।
2 of 8
मास्टर
- फोटो : फिल्म पोस्टर
निर्देशक लोकेश कंगराज की पहचान तमिल सिनेमा में कमल हासन के आभामंडल की परिक्रमा करते रहने वाले किसी नक्षत्र की तरह रही है। फिल्म ‘मास्टर’ में वह विजय के साथ हैं। जाहिर है जब ऊपर उठ रहे किसी निर्देशक से कोई चोटी पर बैठा कलाकार वहां से उतरकर बीच में आकर मिलता है तो यह मिलन सिनेमा के लिहाज से किधर भी करवट ले सकता है, पर ‘मास्टर’ मास्टरपीस भले न हो लेकिन मसाला सिनेमा के फैंस को वापस सिनेमाघरों में लाने का दम रखने वाली फिल्म है।
अनलॉक के बाद सिनेमाघरों में फिल्मों का शुभारंभ तो बीते साल ही हो गया और हॉलीवुड की दो फिल्में ‘टेनेट’ व ‘वंडर वूमन 84’ भारत से अच्छी खासी रकम भी बटोर ले गईं लेकिन भारतीय सिनेमाघरों (और विदेशों में भी) किसी भारतीय फिल्म की असली बयार अब आई है। जिन सितारों ये शक है कि जनता सिनेमाघरों तक आएगी कि नहीं और वह अपनी बड़े बजट की फिल्में रिलीज करें कि नहीं, उनको दाद देनी चाहिए तमिल सिनेमा के सितारे विजय औऱ विजय सेतुपति की।
हिम्मत का का काम फिल्म ‘मास्टर’ के निर्माता जेवियर ब्रिटो ने भी किया है। भले हवाई जहाज और रेलगाड़ियां सौ फीसदी क्षमता के साथ चल रहे हैं लेकिन सिनेमाघरों में 50 फीसदी लोगों की ही छूट है। इसके बाद भी ब्रिटो ने रिस्क लिया अपनी मेगा बजट फिल्म की रिलीज का और आंकड़े बता रहे हैं कि उनकी झोली इस फिल्म से लबालब भरने वाली है।
5 of 8
मास्टर
- फोटो : इंस्टाग्राम
फिल्म ‘मास्टर’ का असली करंट इसके दो दिग्गज सितारों के आमना सामना होने में है। लेकिन, कहानी थोड़ा पीछे जाकर शुरू होती है। भवानी के बचपन से। माता पिता को खो चुके भवानी की परवरिश जिस माहौल में होती है, वही उसका रक्त, मज्जा और मांस बन जाता है। हाथ उसका ढाई किलो से भी ज्यादा वजनी हो चुका है।