-निर्माताः विधु विनोद चोपड़ा
-निर्देशकः राजकुमार हिरानी
-सितारेः रणबीर कपूर, परेश रावल, दीया मिर्जा, मनीषा कोइराला, अनुष्का शर्मा, विक्की कौशल, बोमन ईरानी
रेटिंग **
यह फिल्म संजय दत्त की बायोपिक नहीं है। यह संजय का वह बयान है, जो उन्होंने निर्देशक राजू हिरानी को बायोपिक बनाने के लिए सुनाया था। जो बताता है कि संजू एक मासूम, लोगों के द्वारा भटकाए और गलत समझे गए व्यक्ति हैं। फिल्म संजय की जिंदगी दिखाने के बजाय यह एजेंडा लेकर चलती है कि उनकी जिंदगी में जो कुछ गलत हुआ, उसके जिम्मेदार दूसरे लोग हैं। किसी ने उन्हें ड्रग्स की लत लगाई तो किसी ने घर में एके-57 रखने की सलाह दी।
वह तो खुद पुलिस के सामने पेश होना चाहते थे परंतु उन्हें अपराधी की तरह पकड़ लिया गया। उन पर टाडा लगा। उनकी नशाखोरी, रंगीन जिंदगी और अंडरवर्ल्ड के साथ संबंधों की जो खबरें आईं उनमें दम नहीं था बल्कि वह मीडिया की कारस्तानी थी। मीडिया ही संजय को लेकर बार-बार राई का पहाड़ खड़ा करता रहा। संजय को बदनाम करता रहा। खबरें आधारहीन थीं। संजू एक एजेंडा फिल्म है, जिसमें कभी समाज में तो कभी पर्दे पर खलनायक की तरह आए संजय दत्त की जिंदगी का खलनायक मीडिया को बताया गया है।
कहीं-कहीं लगता है कि मीडिया को संजू पानी पी-पी कर कोस रहे हैं, खीझ रहे हैं और हद तो तब हो जाती है जब अंत में वह मीडिया को मां की गाली भी दे रहे हैं! मुद्दा यही है कि संजू की जिंदगी का असली खलनायक कौन है? वह खुद, उनकी परवरिश, उनका परिवेश, उनके दोस्त या फिर मीडिया? फिल्म में कहानी कम और डॉक्युड्रामा ज्यादा है। एक विदेशी लेखक के रूप में अनुष्का शर्मा और संजय दत्त के दोस्त के रूप में विक्की कौशल के नाटकीय किरदार गढ़े गए हैं। जो विश्वसनीय नहीं लगते। फिल्म संजू को पहले ड्रग्स में फंसते और उससे उबरते दिखाती है।
दूसरे हिस्से में बताती है कि कैसे वे 1993 के मुंबई बम विस्फोट के बाद अवैध हथियार रखने के मामले में फंसे, जेल गए, कैसे उनके पिता सुनील दत्त परेशान हुए और अंततः संजू सजा काट कर रिहा हुए। हिरानी भी बुरी तरह से निराश करते हैं क्योंकि वह एजेंडे के भोंपू की तरह सामने आते हैं। संजू भले ही फिल्म में कहता है कि मेरे पिता मेरे हीरो हैं। लेकिन इस बयान में अधिक सच्चाई तब होती जब कथित बायोपिक में संजय खुद का पक्ष फिल्म के माध्यम रखने के बजाय पिता सुनील दत्त की बायोपिक बनवाते और उसमें बताते कि पुत्र के लिए असाधारण सपने देखने वाला एक पिता उसकी करतूतों के कारण किन-किन तकलीफों से गुजरा।
हिरानी की पिछली फिल्मों के मुकाबले संजू कमजोर है और अभी तक परिवार के लायक फिल्में बनाने के बाद वह संजू में कुछ ऐसे दृश्यों तथा संवादों के साथ सामने आते हैं, जिन्हें परिवार के साथ नहीं देखा-सुना जा सकता। वास्तव में फिल्म आपको संजय की जिंदगी की कोई नई खबर नहीं देती। आम फिल्म प्रेमी जो संजय के हीरो रूप के प्रति आकर्षित हैं, उनके लिए यहां कुछ नहीं है। मान्यता से पहले उनकी दो शादियों और टीना मुनीम तथा माधुरी दीक्षित के साथ चले अफेयर यहां से गायब हैं।