Movie Review: आर्टिकल 15
कलाकार: आयुष्मान खुराना, कुमुद मिश्रा, मनोज पाहवा, जीशान अयूब, सयानी गुप्ता, ईशा तलवार आदि
कहानी: गौरव सोलंकी, अनुभव सिन्हा
निर्देशक: अनुभव सिन्हा
निर्माता: जी स्टूडियोज और बनारस मीडिया वर्क्स
रेटिंग: ***1/2
अनुभव सिन्हा बनारस के हैं। अलीगढ़ मुस्लिम यूनीवर्सिटी में पढ़े हैं और इंडिया की बजाय भारत को समझते हैं। टेलीविजन से म्यूजिक वीडियो और म्यूजिक वीडियो से तुम बिन, दस, कैश, रा वन जैसी फिल्में बनाने के बीच अनुभव के भीतर के इस समझदार इंसान पर पूरी नौ फिल्मों तक कमर्शियल सिनेमा हावी रहा। वह पैसा कमाना चाहते थे। नाम तो फिल्म बनाकर हो ही जाता है। 'तुम बिन 2' उनके करियर का टर्निंग प्वाइंट रहा। जिस टी सीरीज ने अनुभव सिन्हा को पहली फिल्म सौंपी, उसी से उनका नाता टूटा तो अनुभव ने हाईवे छोड़ हंसल मेहता वाली पगडंडी पकड़ी। मुल्क से शुरू हुई उनकी यात्रा 'आर्टिकल 15' तक आकर कम से कम ये तो साफ करती है कि अनुभव को अब सिनेमा की सही दिशा मिल गई है।
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'आर्टिकल 15' संविधान का वह हिस्सा है जिसमें धर्म, जाति, भाषा, रंग या लिंग के आधार पर भेदभाव की सख्त मनाही है। हालांकि, इसी संविधान ने आरक्षण देकर देश को जातियों में बांटने का भी काम किया। एक ही किताब के दो अलग अलग तवों पर सुलगती गेहूं और बाजरे की रोटी की गंध महसूस करना ही 'आर्टिकल 15' देखना है। ये तय है कि शाहिद कपूर की फिल्म कबीर सिंह रिलीज के आठवें दिन जितना कमाएगी, आयुष्मान खुराना की ये फिल्म रिलीज के पहले दिन भी नहीं कमा पाएगी। लेकिन, कबीर सिंह करना शाहिद की मजबूरी थी और 'आर्टिकल 15' करना आयुष्मान का मन है। यहीं ये फिल्म जीतती है।
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गौरव सोलंकी की कहानी, अनुभव का निर्देशन और आयुष्मान का अभिनय, ये तीनों बातें इस फिल्म को एक दस्तावेज बनाती हैं। बड़े स्कूल में पढ़ा, विदेश में कढ़ा कोई युवक क्यों आईपीएस बनना चाहता है? गांवों में पूछिए तो अब भी सरकारी नौकरी का मकसद देश की सेवा नहीं बल्कि रिश्वत की मेवा कमाना है। 25 हजार की सिपाही की नौकरी की रिश्वत 15 लाख रुपये तक जा सकती है। 'आर्टिकल 15' का आईपीएस इस मिथ को तोड़ता है। अशोक की लाट लिए कंधे पर घूमते अफसर के सिर पर जाति व्यवस्था की दो लाशें झूलती दिखती हैं तो स्टॉक एक्सचेंज के लाल-हरे पर नजरें टिकाए रहने वाले इंडिया से आगे के भारत का संवेदी सूचकांक दिखता है।
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यह वह सूचकांक है जो नेताओं की मर्जी से घटता बढ़ता है। इंसान यहां किसी शेयर के भाव से ज्यादा अहमियत रखता भी नहीं है। तीन रूपये भाव बढ़ाने की कोशिश हुई और बदले में मिलती है हैवानियत। 'आर्टिकल 15' में राजनीति जैसे दलदल से गुजरते पुलिस वालों का दृश्य याद रहे न रहे, गटर से निकलता इंसानी सिर आपको ताजिंदगी याद रहेगा। विकास की शायद यही असली तस्वीर है। फिल्म आपके भीतर जो कुछ भी है, उसे नए तरीके से सेट करने की कोशिश करती है।
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रणवीर सिंह ने 'पद्मावत' और रणबीर कपूर ने 'संजू' में अपना किरदार करने के लिए जी-जान लगा दी थी, आयुष्मान ने भी इस फिल्म से साबित किया कि मौका मिले तो वह भी उनके जैसा कर दिखाने की काबिलियत रखते हैं। फिल्म में अनुभव के सुख दुख के साथी मनोज पाहवा ने फिर दम दिखाया है। कुमुद मिश्रा का अपना सेट पैटर्न है। ईशा तलवार गेहूं के खेतों में फिल्माए गए गाने में सुंदर दिखी हैं। सयानी गुप्ता हिंदी सिनेमा में धीरे धीरे जगह बना रही हैं, उनका काम प्रभावित करता है। प्रभावित करने लायक फिल्म में इवान मुलिगन की फोटोग्राफी भी है। इवान का कैमरा फिल्म का सबसे बड़ा किरदार बनकर उभरा है।