अभिनेता अविनाश तिवारी इन दिनों अपनी फिल्म 'मडगांव एक्सप्रेस' को लेकर खबरों में बने हुए हैं। इस फिल्म से पहले अविनाश 'बुलबुल' और 'काला' जैसी फिल्मों में अपने अभिनय का दमखम दिखा चुके हैं। हाल ही में अभिनेता ने एक बातचीत में अपने प्रोजेक्ट्स के बारे में बातचीत की है। उन्होंने हाल ही में अपने काम के अनुभव को साझा किया है। उन्होंने कहा कि कॉमेडी मुश्किल है, लेकिन मुझे अलग करना पसंद है। साथ ही हर जॉनर की फिल्में अपने आप में मुश्किल होता है।
2 of 5
अविनाश तिवारी
- फोटो : सोशल मीडिया
उन्होंने अपनी फिल्मों के बारे में बात करते हुए कहा, 'मेरी सभी फिल्में अपने आप में अलग हैं और यही मेरी चाह है। उन्होंने अपनी फिल्म लैला मजनू के बारे में बात करते हुए कहा कि सितंबर 2018 में मेरी फिल्म आई थी, तभी से धीरे-धीरे मुझे लोगों का प्यार मिलने लगा था। लोग मुझे कैश कहर बुलाने लगे थे।'
Ayushmann New Song: टूटे दिल की दास्तान है 'अंख दा तारा', आयुष्मान खुराना का नया गाना जारी
3 of 5
अविनाश तिवारी
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
वेब सीरीज खाकी आने के बाद सोशल मीडिया पर लोग चंदन कहने लगे थे। तो मुझे राहत मिली थी कि एक ही किरदार में मैं नहीं रह गया हूं। आज लोग मुझे कभी कैश, कभी चंदन तो कभी दारा नाम से बुलाते है, तो खुशी मिलती है, कि लोग मुझे मेरे कई किरदारों से पहचान रहे हैं।
4 of 5
मडगांव एक्सप्रेस
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मु्ंबई
वहीं, मडगांव एक्सप्रेस के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि जब हम कॉमेडी कर रहे होते हैं तो हमें आखिरी तक नहीं पता होता कि ये सही बैठेगा या नहीं। हम लोग जब शूट कर रहे थे, तब हम यही बात कर रहे होते थे। क्योंकि ये सब डायरेक्टर को समझ आता है। मुझे मडगांव एक्सप्रेस बहुत पसंद आई और इसका पूरा क्रेडिट कुणाल खेमू को ही जाता है। सभी ने काफी मेहनत की है, लेकिन मडगांव एक्सप्रेस जिस खूबसूरती के साथ पहुंची है, उसके लिए कुणाल ही जिम्मेदार हैं।
5 of 5
अविनाश तिवारी
- फोटो : सोशल मीडिया
90s के दिनों को याद करते हुए अविनाश तिवारी ने कहा, 'नवमीं में मुझे एक लड़की पसंद थी, वो भी स्कूल में थी। शनिवार और रनिवार हमारी छुट्टी होती थी। तो वहां एक हनुमान मंदिर है, उसके ऊपर ही उसका घर था और मेरा दोस्त हनुमान भगवान का भक्त था। मैं भी उन दिनों भक्त बन गया था। तो मुझे हनुमान चालीसा जो आती है, वो इसीलिए आती है कि मैं उनके घर के चक्कर लगाने जाता था। मंदिर के सामने ही एक पीसीओ था, मैं उससे मिस्ड कॉल करता था, जिसके बाद वह अपनी बालकनी में आती थीं और फिर मैं उन्हें देखते हुए बड़े स्टाइल में बाय करते हुए निकल जाता था।'
Archana Puran Singh: पुराने दिनों को याद कर भावुक हुईं अर्चना, सोशल मीडिया पर साझा किया जिंदगी का अनुभव