चार्ली चैपलिन (Charlie Chaplin) एक ऐसी हस्ती जिसे 132 साल बाद भी किसी परिचय की जरूर नहीं, क्योंकि लोगों के दिल-ओ-दिमाग में वो आज भी जिंदा हैं। चार्ली ही उस जमाने में मनोरंजन जगत की ऐसी शख्सियत थे, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर ख्याति प्राप्त करने का कारनामा कर दिखाया था। देश-विदेश में पसंद किए जाने वाले महान अभिनेता चार्ली की भारत में भी अच्छी लोकप्रियता थी। यहां तो आज लोग उनके गुदगुदाने वाले कॉमिक शोज को भूल नहीं पाए हैं। आज उनकी 132वीं जयंती पर उनसे जुड़ी खास बातें जानेंगे।
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चार्ली चैपलिन
- फोटो : इंस्टाग्राम
चार्ली चैपलिन ने 1977 में अपनी मृत्यु से एक साल पहले तक काम किया। कहते हैं उन्होंने विक्टोरिया युग से लेकर अपनी मृत्यु तक 75 साल तक काम किया। उन्होंने कई ऐसी अनोखी फिल्में कीं जो आज भी प्रासंगिक हैं। उनका असली नाम सर चार्ल्स स्पेंसर चैपलिन केबीई था, जो बाद में चार्ली चैपलिन के तौर पर मशहूर हुआ।
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चार्ली चैपलिन
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चार्ली चैपलिन एक बेहतरीन हास्य अभिनेता, फिल्म निर्माता और संगीतकार थे। खासकर वे मूक फिल्मों के युग के महान किरदार थे। आकर्षक छवि वाले चार्ली अपनी फिल्म ‘द ट्रैम्प’ के कारण वर्ल्ड आइकॉन बन गए थे। फिल्म उद्योग के इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण सहयोग में उन्हें ऊंचा दर्जा प्राप्त है।
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चार्ली चैपलिन
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शायद कम ही लोग जानते होंगे कि चार्ली महज पांच साल की उम्र से काम करने लगे थे। इसके पीछे उनकी एक गहरी पीड़ा छिपी थी। जब चैपलिन पांच साल के थे, तब एक उपद्रवी सैनिकों की भीड़ के सामने उनकी मां की आवाज चली गई थी। मंच प्रबंधकों ने चैपलिन को उनकी मां की जगह गाने के लिए भेजा। उन्होंने जैक जोन्स नामक एक लोकप्रिय गीत गाया। दर्शकों ने इसे काफी पसंद किया और उनपर पैसे लुटाए।
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चार्ली चैपलिन
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उस समय में मूक फिल्मों का दौर था। तब चार्ली ने ‘टॉकीज’ के आने का विरोध किया। लेकिन बाद में वे खुद ही आवाज के साथ फिल्में बनाने में जुट गए। यह सब 1927 में ‘द जैज सिंगर’ के साथ शुरू हुआ। इस दौरान ऑडियो वाली फिल्मों ने तेजी से लोकप्रिता बटोरना शुरू कर दी थी। उस समय चार्ली नई तकनीक को अपनाने से हिचकिचा रहे थे। डर था कि वो बर्बाद न हो जाएं।