Nasir Hussain: शादीशुदा होने के बाद भी आशा पारेख से दिल लगा बैठे थे नासिर हुसैन, भतीजे आमिर को बनाया सुपरस्टार
Nasir Hussain: एक ऐसा निर्देशक, जिसने किसी अभिनेता के स्टारडम का कभी समर्थन नहीं किया, बल्कि अपनी कहानियों के दम पर अपनी फिल्में बनाईं, जो कि हिट साबित हुईं। पुण्यतिथि के मौके पर जानिए इस निर्देशक के बारे में।
विस्तार
अगर किसी फिल्म में एक्शन, कॉमेडी और रोमांस सबकुछ मिल जाए और साथ में फिल्म का संगीत ऐसा हो कि गाने सालों बाद तक आपकी जुबान पर बने रहें, तो भला ऐसी फिल्मों को कौन नहीं देखना चाहेगा और कौन नहीं याद रखेगा। हालांकि, ऐसी फिल्म बनाना आसान भी नहीं होता है, इसीलिए शायद अब ऐसी फिल्में बनना कम हो गई हैं। मगर बॉलीवुड के इतिहास में एक ऐसा निर्देशक-निर्माता हुआ है जिसने एक नहीं बल्कि कई ऐसी फिल्में बनाई हैं, जिसमें आपको एक्शन, कॉमेडी, रोमांस और ड्रामा सबकुछ देखने को मिलेगा, साथ ही फिल्मों का संगीत भी आपको हमेशा याद रहेगा, नाम है नासिर हुसैन। अपनी फिल्मों के यादगार संगीत के लिए मशहूर नासिर हुसैन सिर्फ निर्देशक ही नहीं बल्कि पटकथा लेखक और निर्माता भी थे। उन्होंने बॉलीवुड को कई यादगार फिल्में दीं। आज नासिर हुसैन की 23वीं पुण्यतिथि पर जानते हैं उनसे जुड़े कुछ किस्से।
बतौर पटकथा लेखक की करियर की शुरूआत
1926 को भोपाल में जन्मे नासिर हुसैन ने अपने करियर की शुरूआत बतौर पटकथा लेखक (स्क्रिप्ट राइटर) की थी। 1948 में नासिर हुसैन ने कमर जलालाबादी के साथ फिल्मिस्तान कंपनी के लिए काम किया, जहां वो बतौर पटकथा लेखक काम करते थे। इस दौरान फिल्मिस्तान के लिए नासिर हुसैन ने कई हिट फिल्में लिखीं, जिनमें ‘अनारकली’, ‘मुनीम जी’ और ‘पेयिंग गेस्ट’ जैसी बेहतरीन फिल्में शामिल हैं।
1957 में निर्देशक के रूप में की शुरूआत
पटकथा लेखक के रूप में काम करने के बाद 1957 में शशधर मुखर्जी ने नासिर हुसैन को बतौर फिल्म निर्देशक पहली फिल्म दी ‘तुमसा नहीं देखा’ शम्मी कपूर, अनीता और प्राण जैसे कलाकारों से सजी ये फिल्म दर्शकों को खूब पसंद आई। इस फिल्म ने शम्मी कपूर की किस्मत बदलकर रख दी। इसके बाद 1959 में नासिर हुसैन ने शम्मी कपूर को लेकर एक और फिल्म बनाई ‘दिल देके देखो’। इस फिल्म में नासिर हुसैन ने आशा पारेख के रूप में एक नई अभिनेत्री को लॉन्च किया था। ये फिल्म भी काफी पसंद की गई। इसके बाद नासिर हुसैन ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और बतौर निर्देशक एक के बाद एक कई सुपरहिट फिल्में दीं। जिनमें ‘जब प्यार किसी से होता है’, ‘फिर वो ही दिल लाया हूं’, ‘कारवां’, ‘हम किसी से कम नहीं’ और ‘आंगन’ जैसी कई फिल्में शामिल हैं।
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शुरू किया खुद का प्रोडक्शन हाउस, बने निर्देशक-निर्माता
निर्देशक के रूप में सफलता पाने के बाद नासिर हुसैन ने अपना खुद का प्रोडक्शन हाउस खोल लिया और निर्माता-निर्देशक बन गए। नासिर हुसैन फिल्म्स के तहत उन्होंने एक से बढ़कर एक म्यूजिकल हिट फिल्में दीं। जिनमें ‘यादों की बारात’ और ‘तीसरी मंजिल’ समेत कई सुपरहिट फिल्में शामिल हैं।
आशा पारेख के इश्क में पड़ गए थे नासिर
फिल्मों के साथ-साथ नासिर हुसैन की व्यक्तिगत जिंदगी भी काफी यादगार और चर्चा में रही। नासिर हुसैन अपनी फिल्म की अभिनेत्री से ही इश्क कर बैठे थे। ये अभिनेत्री कोई और नहीं बल्कि बॉलीवुड की दिग्गज अभिनेत्री आशा पारेख थीं। फिल्म ‘दिल देके देखो’ से महज 16 साल की उम्र में बतौर अभिनेत्री अपना करियर शुरू करने वाली आशा पारेख अपनी पहली फिल्म की शूटिंग के दौरान ही नासिर हुसैन को दिल दे बैठी थीं। दोनों के बीच कितना गहरा प्यार था इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि दोनों ने एक साथ एक-दो नहीं बल्कि सात फिल्मों में साथ काम किया। यही नहीं 1959 में आई आशा पारेख की पहली फिल्म ‘दिल देके देखो’ के बाद से 1971 में ‘कारवां’ तक नासिर हुसैन की हर फिल्म में आशा पारेख ही लीड एक्ट्रेस रहीं।
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इस वजह से मुकम्मल नहीं हो सकी निर्देशक की प्रेम कहानी
नासिर हुसैन और आशा पारेख की प्रेम कहानी काफी चर्चा में रही और लंबे वक्त तक चली। हालांकि, ये प्रेम कहानी इसलिए मुकम्मल नहीं हो सकी क्योंकि नासिर हुसैन पहले से शादीशुदा थे और दो बच्चों के पिता थे। लंबे रिलेशनशिप के बाद आखिरकार आशा पारेख ने इस रिश्ते को खत्म कर दिया। आशा पारेख नहीं चाहती थीं कि उनकी वजह से किसी का घर टूटे। हालांकि, नासिर से रिश्ता टूटने के बाद आशा पारेख ने किसी से शादी नहीं की और सिंगल ही रहीं।
किसी एक्टर की स्टारडम के मोहताज नहीं थे नासिर हुसैन
नासिर हुसैन की खासियत थी कि उन्होंने कभी किसी एक्टर के स्टारडम का सहारा नहीं लिया। इसीलिए उन्होंने किसी भी एक स्टार के साथ जोड़ी नहीं बनाई। नासिर हुसैन ने शम्मी कपूर के साथ तीन फिल्में करने के अलावा देव आनंद, जॉय मुखर्जी, राजेश खन्ना, शशि कपूर, जितेंद्र और धर्मेंद्र को एक-एक फिल्म में निर्देशित किया। राजेश खन्ना के भी साथ उन्होंने उनके करियर के शुरूआती दिनों में काम किया। इसके अलावा दो फिल्मों में उन्होंने ऋषि कपूर के साथ भी काम किया।
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संगीतकार आरडी बर्मन के साथ दिए कई हिट गाने
नासिर हुसैन की फिल्मों की विशेषता उनका संगीत होता था। नासिर हुसैन की फिल्मों के गीत आज भी लोगों की जुबान पर बने रहते हैं। फिर वो चाहें 'तीसरी मंजिल' फिल्म के गाने हों, या 'यादों की बारात' और 'हम किसी से कम नहीं' के। नासिर हुसैन की जोड़ी संगीतकार आरडी बर्मन के साथ हिट थी। 1966 में तीसरी मंजिल से शुरू हुआ निर्देशक-संगीतकार की इस जोड़ी का सिलसिला 1985 में आई जबरदस्त तक चला। इस दौरान इस जोड़ी ने कई सदाबहार नगमें दिए, जो आज भी उतने ही पसंद किए जाते हैं।
दर्शकों के गुस्से की वजह से बदल दिया था फिल्म का क्लाइमेक्स
साल 1967 में आई फिल्म ‘बहारों के सपने’ से जुड़ा नासिर हुसैन का एक किस्सा काफी मशहूर है, जहां दर्शकों का गुस्सा देखकर नासिर हुसैन ने फिल्म का क्लाइमेक्स ही बदल दिया था। आशा पारेख और राजेश खन्ना स्टारर यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं रही थी। दर्शकों को फिल्म का क्लाइमेक्स पसंद नहीं आया। जिससे नाराज होकर नासिर हुसैन ने फिल्म का क्लाइमेक्स ही बदल डाला था। दरअसल, इससे पहले नासिर की सभी फिल्मों में रोमांस होता था और एक हैप्पी एंडिंग होती थी, लेकिन इस फिल्म का अंत काफी दुखद था। इसलिए दर्शकों को फिल्म का अंत पसंद नहीं आया और फिल्म फ्लॉप हो गई। जिसके बाद नासिर ने सिर्फ दो दिन में फिल्म का नया क्लाइमेक्स लिखकर शूट किया। फिर इस फिल्म को दूसरे हफ्ते में नई और हैप्पी एंडिंग के साथ एक बार फिर से रिलीज किया गया। हालांकि, फिल्म फिर भी चल नहीं पाई। जिसके बाद नासिर हुसैन ने कभी भी अपनी फिल्म का दुखत अंत नहीं रखा।
लखनऊ यूनिवर्सिटी में पढ़ाई करते हुए लिखी थी फिल्म की कहानी
फिल्म ‘बहारों के सपने’ नासिर के दिल के बेहद करीब थी, जिसका कारण था कि उन्होंने इस फिल्म की कहानी लखनऊ यूनिवर्सिटी में पढ़ाई करते हुए लिखी थी। इस फिल्म की कहानी के लिए नासिर हुसैन को अवॉर्ड भी मिला था, तभी से उन्होंने ये सोच लिया था कि एक दिन वो इस कहानी पर फिल्म जरूर बनाएंगे और वो अपने इसी सपने को पूरा करने के लिए मुंबई आए। बहारों के सपने उनकी पिछली सभी फिल्मों से बिल्कुल अलग थी। ये फिल्म रंगीन फिल्मों के दौर में एक ब्लैक एंड व्हाइट फिल्म थी।
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नासिर हुसैन ने 1988 में आई आमिर खान की पहली फिल्म ‘कयामत से कयामत तक’ की कहानी और संवाद लिखे थे। साथ ही वो फिल्म के निर्माता भी थे। इसके अलावा 1992 में आई आमिर की ‘जो जीता वही सिकंदर’ को भी प्रोड्यूस करने के साथ-साथ फिल्म की कहानी और संवाद नासिर हुसैन ने ही लिखे थे।