रजनीकांत की हर अदा, उस समय की स्टाईल स्टेटमेंट बन जाती है। 67 के हो चुके रजनी के साथ 20 बरस की नायिकाएं काम करने के इच्छुक हैं। रजनीकांत साऊथ की फिल्मों में सुपरहिट होने की गांरटी हैं।
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रजनीकांत साऊथ की फिल्में के इतने बड़े सुपरस्टार हैं कि उनके पर्दे पर आने पर हवा में सिर्फ सिक्के और नोट उछलते नजर आते हैं। जब कई सिनेमाघरों के पर्दे सिक्के पड़ने की वजह से खराब होने शुरू हुए तो टिकट के साथ दर्शकों के सिक्के गेट पर चेक किए जाने लगे।
दक्षिण भारत में रजनीकांत की लोकप्रियता का आलम यह है कि कि कई बार दोपहर 12 बजे से शुरु होने वाले फिल्मों की शो दर्शकों के दबाव में सुबह के पांच बजे शुरू करने पड़े। इंटरनेट की दुनिया में उनसे जुड़ा एक चुटकुला हमेशा जिंदा रहा है। चुटकुला कहता है कि यदि रजनीकांत के समर्थक दर्शकों का एक देश बनाया जाए तो उसकी जनसंख्या मुल्क के कई देशों से ज्यादा होगी।
अपनी आखिरी फिल्म 'रोबोट' में उन्होंने भाषा और देश की सीमा को भी लांघ लिया। इसे उनकी लाऊड और ओवरऐक्टिंग का अंदाज कहें या फिर दक्षिण भारतीय नायकों को लेकर दर्शकों का पूर्वाग्रह, कि रजनीकांत हिंदी पट्टी के दर्शकों को बहुत रास नहीं आए हैं।
हिंदी की कुछ एक्शन फिल्मों में रजनीकांत दिखे हैं पर वह साऊथ वाले अंदाज में पसंद नहीं किए गए। 80 के दशक में उनकी कुछ फिल्में अमिताभ बच्चन के साथ भी आईं। दो महानायकों के एक साथ फिल्म में काम करने का चार्म भी फिल्मों को हिट नहीं बना सका। इसके उलट रजनीकांत की मुख्य भूमिका वाली जो भी तमिल-तेलुगू फिल्में हिंदी में रीमेक की गईं ऐसी फिल्में भारत में सफल हुई हैं। 'रोबोट' इसका सबसे ताजा उदाहरण है।