अपनी अदाकारी से दर्शकों का दिल जीतने वाली अभिनेत्री वैजयंती माला का आज जन्मदिन है। उन्होंने करीब 2 दशकों तक हिंदी सिनेमा पर राज किया और एक से बढ़कर एक सुपरस्टार एक्टर के साथ काम किया। वैजयंती माला को 'ट्विंकल टोज' के नाम से भी जाना जाता रहा है। 'बदन पे सितारे लपेटे हुए..' का मूल गाना अगर आपने सुना है तो वैजयंतीमाला को कैसे भूल सकते हैं। यह गाना साल 1969 में फिल्म 'प्रिंस' में वैजयंतीमाला और दिवंगत अभिनेता शम्मी कपूर पर फिल्माया गया था।
वैजंयतीमाला को एक्टिंग विरासत में मिली थी। दरअसल, उनकी मां वसुंधरा 40 के दशक में तमिल फिल्मों में काफी मशहूर थी। वैजंयती माला को स्टेज पर डांस करते देख एक निर्देशक ने उन्हें अपने फिल्म में एक्टिंग के लिए ऑफर दिया था लेकिन वैजंयती की मां को को लगता था कि उनकी पढ़ाई बर्बाद हो जाएगी, लेकिन काफी मनाने के बाद आखिर उनकी मां राजी हुईं।
एक वक्त के बाद जब वैजयंतीमाला फिल्मों में फेमस हो गई तो उन्होंने अवॉर्ड लेने से भी मना कर दिया। दरअसल फिल्म 'देवदास' में उन्होंने चंद्रमुखी की भूमिका निभाई थी, जिसके लिए उन्हें फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री के पुरस्कार से सम्मानित किया गया, लेकिन वैजयंती ने ये अवॉर्ड लेने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि देवदास की जिंदगी में पारो से ज्यादा चंद्रमुखी महत्वपूर्ण थी, इसलिए अगर देना है तो बेस्ट एक्ट्रेस का अवॉर्ड दिया जाए।
वैजयंती माला की निजी जिंदगी भी काफी विवादों में रही थी। फिल्म की शूटिंग के दौरान ही वैजयंती माला की नजदीकियां दिलीप कुमार और राज कपूर से भी रहीं। 1961 में आई फिल्म 'गंगा जमुना' के सेट पर दिलीप कुमार संग उनका अफेयर शुरू हआ। वैजयंती माला और राज कपूर का भी अफेयर बताया जाता है। दोनों एक साथ बड़े परदे पर 'नजराना' और 'संगम' फिल्म में नजर आए थे लेकिन जब ये बात राज कपूर की पत्नी को पता चली तो कृष्णा कपूर घर छोड़कर चली गईं और करीब साढ़े चार महीने मुंबई के नटराज होटल में रही थीं। राज कपूर के काफी मनाने के बाद कृष्णा कपूर इस शर्त पर मानीं कि वो फिर कभी वैजयंती माला के साथ काम नहीं करेंगे। इसलिए ये रिश्ता ज्यादा दिनों तक टिक नहीं पाया और दोनों एक दूसरे से अलग हो गए।
इसके बाद साल 1968 में वैजयंती माला ने डॉ. बाली से शादी कर ली। दोनों के बीच पनपी प्रेम कहानी किसी फिल्मी स्टोरी से कम नहीं थी। एक बार फिल्म की शूटिंग के दौरान एक बार वैजयंती को निमोनिया हो गया था। उनका इलाज चमनलाल डॉ. बाली कर रहे थे। बाली भी वैजयंती के प्यार में दीवाने हो गए और इलाज करते-करते दोनों में प्यार हो गया और दोनों ने शादी कर ली।