मीटू: वैरामुत्तु ने ओएनवी साहित्य पुरस्कार वापस करने का लिया फैसला, यौन शोषण के लगे थे आरोप
तमिल फिल्मों के जाने-माने गीतकार ने ओएनवी साहित्य पुरस्कार वापस करने का निर्णय लिया है। यह फैसला उन्होंने अपने खिलाफ चल रहे विरोध के कारण लिया है। दरअसल, वैरामुत्तु पर यौन शोषण जैसे संगीन आरोप लग चुके हैं। यह आरोप चेन्नई एक्सप्रेस के मशहूर गाने तितली की गायिका चिन्मयी श्रीपदा ने लगाया था।
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तमिल फिल्मों के गीतकार वैरामुत्तु एक बार फिर चर्चा मेें आ गए हैं। दरअसल, ओएनवी साहित्य अकादमी ने कहा है कि वो जाने-माने तमिल गीतकार वैरामुत्तु को पांचवां साहित्य पुरस्कार देने के फैसले पर एक बार फिर सोच-विचार करेगी। ऐसा करने का फैसला इसलिए लिया गया है क्योंकि वैरामुत्तु के खिलाफ मीटू अभियान के चलते कई संगीन आरोप लगे हैं और लोगों ने उनको पुरस्कार से सम्मानित किए जाने पर जमकर विरोध किया है। अब वैरामुत्तु ने एलान कर दिया है कि वो खुद ही इस पुरस्कार को वापस कर देंगे। उनका कहना है कि जूरी के सामने ऐसी असहज स्थिति नहीं आनी चाहिए, इसलिए वो यह निर्णय ले रहे हैं। साथ ही उन्होंने अनुरोध किया है कि अकादमी द्वारा घोषित तीन लाख रुपये का नकद पुरस्कार केरल मुख्यमंत्री राहत कोष में दिया जाए।
यह पुरस्कार दिग्गज कवि ओएनवी कुरुप के सम्मान में दिया जाता है। मलयालम अभिनेत्री पार्वती तिरुवुत्तु समेत कई हस्तियों ने इस प्रतिष्ठित पुरस्कार से वैरामुत्तु को सम्मानित करने के फैसले की आलोचना की थी। पार्वती ने कहा था कि एक यौन शोषण के आरोपी को यह पुरस्कार देकर कुरुप का अपमान करने जैसा होगा। इसपर गायिका चिन्मयी श्रीपदा ने पार्वती का आभार जताया है। चिन्मयी का कहना है कि उन महिलाओं का बहुत-बहुत आभार जो इसके समर्थन में बोल रही हैं। अभिनेत्री गीतू मोहनदस ने लिखा, ‘हमारी महान साहित्यिक शख्सियत के नाम पर दिया जाने वाला पुरस्कार ऐसे व्यक्ति को नहीं दिया जाना चाहिए जिस पर यौन शोषण के आरोप लगे हों।
बता दें कि साल 2018 में चिन्मयी ने वैरामुत्तु पर यौन शोषण का आरोप लगाया था। उनका कहना था कि जब वो 19 साल की थीं तब वह अपनी मां के साथ एक बहुत ही सम्मानित व्यक्ति से मिलने गई थी। मां के साथ होने के बावजूद भी उस व्यक्ति ने उन्हें एक कमरे में बुलाया और जैसे ही वो कमरे में घुसीं, वह आदमी उनके गले लग गया। जब चिन्मयी वहां से भागीं तो उसने उनका फोन और पर्स छीन लिया। यह व्यक्ति कोई और नहीं बल्कि वैरामुत्तु थे। साल 2020 में चिन्मयी ने यह मोर्चा दोबारा शुरू किया था। उन्होंने एक महिला का ट्वीट साझा किया था जिसमें उन्होंने वैरामुत्तु पर यौन शोषण के आरोप लगाए थे और कहा था कि पिछले दो सालों में उनके खिलाफ यह 17वीं शिकायत है।
गौरतलब है कि यह पुरस्कार मलयालम तथा अन्य भारतीय भाषाओं के कवियों को दिया जाता है। पुरस्कार के तहत तीन लाख रुपये की नकद राशि और एक प्रशस्ति पत्र दिया जाता है। मलयालम विश्वविद्यालय के कुलपति अनिल वल्लाथोल और कवि अलंकोड लीलाकृष्णन और प्रभा वर्मा पर आधारित विशेषज्ञ निर्णायक समिति विजेता का चयन करती है।