‘सीता राम चरित अति पावन, मधुर सरस और अति मन भावन…’ के बोल बजते हुए घंटों की मधुर सुर वाणी के साथ हमारे कानों में प्रवेश करते हैं तो स्वतः ही हमें रामायण की याद आ जाती है। रामायण और महाभारत जैसे टीवी धारावाहिक तो हर जमाने में बनाए गए, लेकिन रामानंद सागर की रामायण अन्य के मुकाबले इतिहास में मील का पत्थर साबित हुई। रामानंद सागर की रामायण आज भी भारतीय दर्शकों के दिल-ओ-दिमाग में घर किए हुई है।
दशकों तक टीवी पर राज करने वाली रामायण को ऐसे मिले थे सीता, राम और लक्ष्मण
इसके प्रति दर्शकों के प्रेम का अंदाजा आखिर इस बात से लगाया जा सकता है कि देश में लॉकडाउन के दौरान जब रामायण को दोबारा दूरदर्शन पर प्रसारित किया गया, तो इसने कल्पना से परे टीआरपी के सारे रिकॉर्ड धाराशायी कर दिए। आम दर्शक ही नहीं बल्कि केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर और अश्विनी कुमार चौबे जैसी राजनीतिक हस्तियां भी इस क्षण का हिस्सा बनीं। लॉकडाउन के दिनों में घर में बैठकर पूरे परिवार ने फिर एक साथ रामायण देखी तो मानों 1987 की यादें ताजा हो गईं। यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि रामानंद सागर की रामायण किसी दशक या समय की नहीं है, बल्कि इसने हर जमाने को अपना बना लिया है और कालचक्र पर विजयी हो गई।
लेकिन इन सबके बीच आपमें से कइयों के जहन में यह सवाल भी आता होगा कि आखिर सीता, राम और लक्ष्मण का किरदार निभाने के लिए चुनाव कैसे किया गया? कैसे ऑडीशन लिए गए होंगे और किसने उनमें भगवान का रूप देखा होगा? क्योंकि मानवीय शरीर को कला से तराशकर उसमें भगवान की झलक दिखाना वाकई एक बड़ी चुनौती थी। इसके अलावा भाषाई संपन्नता भी एक बड़ी चिंता थी। शुद्ध श्लोकों और धारदार भाषा वाले किरदारों का चयन करना इतना आसान भी नहीं था। बाद में इसका खुलासा खुद रामायण में किरदार निभाने वाले कलाकारों ने किया। इनके चयन का किस्सा बड़ा ही दिलचस्प है।
किसी भी किरदार को अमर कर देने के लिए उसे निभाने वाले कलाकार में शिद्दत जरूरी है। कुछ ऐसा ही रामायण के किरदारों के साथ भी हुआ। इसमें दीपिका चिखलिया, अरुण गोविल और सुनील लहरी ने सीता, राम और लक्ष्मण की भूमिका निभाई थी। इन तीनों ने मिलकर एक बार कपिल शर्मा के कॉमेडी में पूरी कहानी खोलकर रख दी थी।
अरुण गोविल ने बताया था ‘एक दिन मुझे पता चला कि सागर साहब (रामानंद सागर) रामायण बनाने वाले हैं। न जाने क्यों मुझे ख्याल आया कि मुझे राम जी का किरदार निभाना है। मैं उनके पास चला गया और कहा कि आप रामायण बना रहे हैं, मुझे राम जी का रोल करना है। सागर जी मोटा चश्मा लगाते थे, मगर देखते बड़ा-बड़ा थे। पहले तो वो सोच में पड़ गए फिर टालते हुए बोले कि समय आएगा तो बताएंगे। फिर टाइम आया, उन्होंने मेरा ऑडिशन लिया और मैं रिजेक्ट हो गया। उनके सुपुत्र आनंद जी मुझे भरत का किरदार निभाने के लिए कहते रहे और इसकी खूबियां गिनाते रहे। लेकिन मैंने कहा मैं तो राम का किरदार करने ही आया हूं। अगर मैं उसके लिए सटीक नहीं हूं तो कोई बात नहीं है। फिर एक दिन सागर साहब का फोन और उन्होंने पूछा कि क्या कर रहे हो? मैंने कहा कुछ नहीं घर पर हूं। यह जानकर उन्होंने मुझे घर बुला लिया। कहा कि हमारी सेलेक्शन कमिटी ने तय किया है लेकिन तुम्हारे जैसा राम नहीं मिल रहा है। इस तरह मुझे राम का रोल मिल गया’।