साउथ फिल्म इंडस्ट्री की मशहूर अभिनेत्री रह चुकीं भानुप्रिया किसी परिचय की मोहताज नहीं हैं । भानुप्रिया 15 जनवरी को अपना जन्मदिन मनाती हैं। भानुप्रिया ने अपनी एक्टिंग और खूबसूरती के दम पर साउथ ही नहीं बॉलीवुड में भी खूब नाम कमाया । आंध्र प्रदेश के राजमुंदरी में जन्मीं भानुप्रिया ने 17 साल की उम्र में एक्टिंग में कदम रखा था । उनकी पहली फिल्म 'मेल्ला पेसुन्गल' है जो 1983 में रिलीज हुई थी ।
भानु ने साउथ में पॉपुलैरिटी हासिल करने के बाद 90 के दशक में बॉलीवुड में कदम रखा । भानुप्रिया की फिल्मों में आने की कहानी भी बेहद दिलचस्प है । भानुप्रिया का असली नाम मंगा भामा है। उनका पहले से कोई फिल्मी बैकग्राउंड नहीं रहा है। जब वो स्कूल में पढ़ाई कर रहीं थीं तब एक दिन भाग्यराजा गुरु वहां आए। वो अपनी फिल्म के लिए एक टीन गर्ल लेना चाहते थे जिसे डांस करना आता हो ।
उन्होंने भानुप्रिया को सिलेक्ट किया, लेकिन एक फोटोशूट के दौरान उन्हें लगा कि भानु काफी छोटी है, इसलिए उन्हें इस फिल्म में नहीं लिया गया। इसके बाद भानु दोबारा कभी स्कूल नहीं गईं । उन्होंने स्कूल में पहले ही बोल दिया था कि वे फिल्मों में रोल कर रही हैं और फिल्म हाथ से निकलने के बाद स्कूल जातीं, तो उनका मजाक बनता। इसके बाद उन्होंने फिल्मों में काम ढूंढा और सफलता भी मिली ।
इस बीच भानुप्रिया फोटोशूट भी करवाती थीं । उनके फोटोशूट पर जब भारतीराजा गुरु की नजर पड़ी तो उन्होंने तमिल फिल्म 'Pasiyadu' में उन्हें मौका दिया। जब वो यह फिल्म कर रहीं थीं, तभी उन्हें वामसी गुरु की 'सितारा' ऑफर हुई और उसके बाद 'चंद्रंगम'। सबसे पहले 'सितारा' रिलीज हुई, जो बड़ी हिट साबित हुई और नेशनल लेवल पर बेस्ट रीजनल फिल्म के साथ कई अवॉर्ड्स अपने नाम किए।
भानुप्रिया ने 1986 में फिल्म 'दोस्ती दुश्मनी' से बॉलीवुड में एंट्री ली। वे अब तक लगभग 150 फिल्मों में काम कर चुकी हैं, जिनमें 'इंसाफ की पुकार' (1987), 'खुदगर्ज़' (1987), 'मर मिटेंगे'(1988), 'तमंचा' (1988), 'सूर्या' (एन अवेकनिंग) (1989), 'दाव पेंच' (1989), 'ग़रीबों का दाता' (1989), 'कसम वर्दी की' (1989), 'जहरीले' (1990) और 'भाभी' (1991) शामिल हैं। भानुप्रिया की ज्यादातर फिल्मों में उनके कोस्टार जितेन्द्र रहे।