हिंदी सिनेमा में ऐसी कई फिल्में बनी हैं, जो आज भी लोगों के दिलों पर राज करती हैं और हमेशा करती रहेंगी। फिल्म का हर एक सीन, डायलॉग और किरदार लोगों के जेहन में बसा हुआ है। आज हम ऐसी ही एक फिल्म की बात कर रहे हैं, जिसके एक किरदार को लोग कभी नहीं भूल सकते। आज हम बात करने जा रहे हैं साल 1975 में आई फिल्म 'शोले' में मौसी का किरदार निभाकर मशहूर हुईं अभिनेत्री लीला मिश्रा के बारे में। लीला मिश्रा अचानक ही फिल्मों में आ गई थी और उनका फिल्मी दुनिया में आने का किस्सा बेहद दिलचस्प है, जो हम आपको बताने जा रहे हैं।
फिल्म 'शोले' में हर किरदार अलग था और आज भी लोगों के जेहन में बसा हुआ है। लेकिन मौसी का किरदार भी लोगों को काफी पसंद आया था। मौसी और जय (अमिताभ बच्चन) का संवाद आज भी लोगों के दिलों में है। अपने जमाने की मशहूर अभिनेत्री लीला मिश्रा का जन्म उत्तर प्रदेश के एक गांव के जमींदार के घर में हुआ था। लीला को शिक्षा-दीक्षा नहीं मिल सकी थी, क्योंकि उनके घर में लड़कियों को पढ़ने की इजाजत नहीं थी। इसी वजह से लीला की शादी भी बेहद कम उम्र में हो गई।
लीला की उम्र सिर्फ 12 साल रही होगी जब उनकी शादी बनारस के रहने वाले राम प्रसाद मिश्रा के साथ कर दी गई थी। शादी के कुछ ही सालों के भीतर लीला मिश्रा मां बन चुकी थीं। अपनी जिंदगी के 17 वर्ष पूरे होने तक लीला मिश्रा दो बच्चों की मां बन गईं थीं। उनकी दो बेटियां थीं। वह जायस रायबरेली से आती थीं, वह और उनके पति जमींदार परिवारों से थे।
राम प्रसाद का स्वभाव बेहद खुले विचारों वाला था, वो किसी भी चीज को लेकर दबाव नहीं बनाते थे। लीला भी उन्होंने अपने फैसले लेने की पूरी आजादी दी हुई थी। लीला के पति राम प्रसाद अक्सर बॉम्बे आया-जाया करते थे और वहां कश्मीरी नाटकों में काम किया करते थे। बॉम्बे में ही राम प्रसाद के एक दोस्त रहते थे, जो कि दादा साहेब फाल्के की फिल्म कंपनी में काम करते थे। एक दिन वो राम प्रसाद के घर आए। उन्होंने लीला को देखा और उनकी खूबसूरती और भोली सी सूरत को देखकर उन्होंने अपने दोस्त राम प्रसाद को लीला को फिल्मों में काम करने को लेकर सलाह दी।
पहले तो राम प्रसाद ने इस बात के लिए साफ इनकार कर दिया लेकिन फिर मामा के समझाने के बाद वो मान गए। इसके बाद राम प्रसाद व लीला दोनों ही बॉम्बे के लिए रवाना हो गए थे। जहां पहुंचकर दोनों ने अपनी अदाकारी शुरू की और फिल्मों में काम मांगने के लिए जाने लगे। इन दोनों की पहली फिल्म साल 1936 में एक साथ आई थी, जिसका नाम 'सती सुलोचना' था। इसमें राम प्रसाद ने रावण का किरदार निभाया था, तो लीला ने मंदोदरी का रोल अदा किया था। इस फिल्म में काम करने के लिए लीला को 500 रुपये मिले थे।