15 अगस्त को बॉलीवुड की मास्टरपीस फिल्म 'शोले' को 41 साल पूरे हो गए। इन चार दशकों में बॉलीवुड ने बॉक्स ऑफिस पर काफी 'शोले' भड़काने की कोशिशें की लेकिन सारी कोशिशें नाकाम ही साबित होती रही हैं। यहां तक कि खुद रमेश सिप्पी 'शोले' को दोहरा नहीं पाए और 'शान', 'शक्ति' और 'अकेला' जैसी फिल्मों से अपनी नाकामी का ग्राफ बढ़ाते रहे। शोले का खुमार बॉलीवुड पर इस कदर छाया रहा कि फिल्मकार शोले की कहानी कई बार अलग-अलग अंदाज से दोहराते रहे।
यहां तक कि फिल्म के किरदार, डायलॉग और फिल्म के गाने के मुखड़ों पर भी फिल्में बनाकर शोले को भुनाने की कोशिश करते रहे और यह सिलसिला आज भी जारी है। आइए नजर डालते हैं उन फिल्मों पर जिसमें शोले को चिंगारी से भड़काने की कोशिश की गई।
'शोले' की चिंगारी तलाश रहा है बॉलीवुड...
'आंधी-तूफान' (1985)
निर्माता पहलाज निहलानी और निर्देशक बी सुभाष ने शशि कपूर, हेमा मालिनी, शत्रुघ्न सिन्हा, मिथुन चक्रवर्ती और मीनाक्षी शेषाद्रि को लेकर एक और शोले बनाने की कोशिश में 'आंधी-तूफान' बनाई लेकिन यह फिल्म दर्शकों को रिझाने में फिसड्डी साबित हुई।
'शोले' की चिंगारी तलाश रहा है बॉलीवुड...
'कर्मा' (1986)
सुभाष घई की दिलीप कुमार, अनिल कपूर, श्रीदेवी और नूतन स्टारर फिल्म 'कर्मा', 'शोले' के 11 साल बाद रिलीज हुई। इसकी कहानी का मूल रूप शोले से प्रभावित था जिसे पूरी तरह नए अंदाज से बनाया गया था। सुभाष घई की यह कोशिश कामयाब तो रही लेकिन इसे शोले के समकक्ष जगह नहीं मिल पाई।
'शोले' की चिंगारी तलाश रहा है बॉलीवुड...
'सूरमा भोपाली' (1988)
अभिनेता जगदीप पर शोले का बुखार कुछ ऐसा चढ़ा कि वो कभी सूरमा भोपाली के अपने किरदार से बाहर ही नहीं निकल पाए। शोले की रिलीज के लगभग 13 साल बाद 1988 में उन्होंने अमिताभ बच्चन, रेखा और धर्मेंद्र जैसे बड़े सितारों के सहारे खुद को सूरमा भोपाली के रूप में मनवाने की कोशिश की लेकिन बॉक्स ऑफिस पर दर्शकों ने ऐसा सूरमा चुराया कि इस भोपाली ने फिर कभी फिल्म बनाने की हिम्मत ही नहीं की।
'शोले' की चिंगारी तलाश रहा है बॉलीवुड...
'रामगढ़ के शोले' (1991)
शोले की रिलीज के 15 साल बाद निर्देशक अजित दीवानी ने शोले के असली गब्बर अमजद खान और राजेंद्र सहित कुछ और सितारों के हमशक्लों को लेकर शोले पर आधारित 2 घंटे की एक फिल्म बना दी। रामगढ़ की इस शोले ने लोगों को हंसाया जरूर लेकिन निर्देशक के मंसूबों पर पानी फिर गया क्योंकि कोई गब्बर को इस रूप में झेलने को तैयार नहीं हुआ।