अपने बेबाक बयानों के लिए मशहूर बॉलीवुड अभिनेता और नेता शत्रुघ्न सिन्हा ने अमर उजाला के लाइव कार्यक्रम के दौरान कई मुद्दों पर बात की। परिवारवाद को लेकर जब शत्रुघ्न सिन्हा से सवाल किया गया तो उन्होंने इसका भी बड़ी ही बेबाकी से जवाब दिया। शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा मुझे आज तक जो भी हासिल हुआ, मेहनत की वजह से मिला।
शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा, 'मैंने फिल्म और पॉलिटिक्स दोनों में नेपोटिज्म का सहारा नहीं लिया। पॉलिटिक्स के लिए मैं लालकृष्ण आडवाणी और अटल बिहारी बाजपेयी जी का आभारी रहूंगा। मैंने जो भी हासिल किया अपनी काबिलियत के दम पर किया। फिल्म इंडस्ट्री में सिर्फ सफलता और विफलता चलती है। सफल बिहार से आया हुआ शत्रुघ्न सिन्हा भी हो सकता है और कोलकाता से आया हुआ मिथुन चक्रवर्ती भी। यहां सिर्फ आपकी सफलता आपका भविष्य तय करती है।
शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा, नेपोटिज्म पर आजकल मैं बहस सुन रहा हूं। किसी भी कलाकार की सफलता तय करती है जनता। जनता आपको सराखों पर भी बिठा सकती है और गिरा भी सकती है। सुशांत सिंह राजपूत के साथ जो भी हुआ, बहुत दुखद हुआ। आत्महत्या किसी भी समस्या का समाधान नहीं हो सकता। आप तो चले जाते हैं लेकिन आपका परिवार अकेला रह जाता है।'
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सोनाक्षी सिन्हा
- फोटो : सोशल मीडिया
उन्होंने आगे कहा, 'मेरे लिए सोनाक्षी का जिक्र करना जरूरी हो जाता है क्योंकि सोनाक्षी ने ट्रोल होने की वजह से अपना सोशल मीडिया ही बंद कर दिया है। कुछ खास ग्रुप के लोग इन दिनों आईटी सेल में एक्टिव हैं जिनका काम सिर्फ ट्रोल करना है। मेरे दोनों बेटे लव और कुश बेहद काबिल हैं लेकिन आज उन्हें जहां होना चाहिए वहां नहीं हैं, लोग तो यहां भी नेपोटिज्म पेश करेंगे। सोनाक्षी की फिल्म अगर चली तो जनता की वजह से चली। सोनाक्षी की फिल्म लुटेरा और अकीरा को जो सफलता मिलनी चाहिए थी वो नहीं मिली।'
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शत्रुघ्न सिन्हा
- फोटो : Social Media
उन्होंने कहा, सोनाक्षी की फिल्में असफल हुईं उस वक्त किसी ने नेपोटिज्म के बारे में चर्चा नहीं की। बात करें शत्रुघ्न सिन्हा के करियर की तो देव आनंद की फिल्म 'प्रेम पुजारी' से बॉलीवुड डेब्यू करने वाले शत्रुघ्न ने पारस (1971), दोस्त (1974), काला पत्थर (1979), दोस्ताना (1980) जैसी फिल्मों में अपनी एक्टिंग का लोहा मनवाया है।