अपने दोनों भाईयों शम्मी कपूर और राजकपूर से उलट शशि कपूर फिल्मों में एक्टिंग से ज्यादा इस काम के लिए मशहूर हुए। इसके सबूत भी सामने हैं। उनकी दिलचस्पी ऑफबीट और पैरलल सिनेमा में थी। उन्होंने अभिनय जरूर मुख्यधारा की फिल्मों में किया लेकिन शशि को जब भी मौका मिला उन्होंने एक अलग तरह का सिनेमा रचने का प्रयास किया।
एक एक्टर के रूप शशि कपूर की चर्चा कभी भी उनके अभिनय को लेकर नहीं हुई। शशि कपूर की जो फिल्में बड़ी हिट साबित हुईं उसमें शशि कपूर के अभिनय के अलावा कुछ दूसरी वजहें भी थीं। उनकी कई रोमांटिक फिल्में सफल रहीं, पर उनकी इमेज एक रोमांटिक हीरो के रूप में नहीं बनीं।
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एक्टर के रूप में औसत और अपेक्षाकृत कम चर्चित शशि कपूर जब फिल्म निर्माण के क्षेत्र में उतरे तो उनकी फिल्मों की जमकर चर्चा हुई। एक प्रोड्यूसर के रूप में उन्होंने अलग-अलग तरह की कई फिल्में बनायीं। वह कई फिल्मों के सहायक निर्देशक भी रहे।
शशि कपूर द्वारा बनायी गयी फिल्में 'जुनून', 'कलयुग', '36 चौरंगी लेन', 'विजेता', 'उत्सव' और 'अजूबा' समीक्षकों द्वारा सराही गयी। शशि कपूर ने यह फिल्मों उस दौर के सबसे बेहतर निर्देशकों से निर्देशित करवायीं। हिंदी फिल्मों में जब भी विविधता की बात आती है शशि कपूर की इन फिल्मों को याद किया जाता है।
एक निर्माता-निर्देशक के रूप में 1991 में आख्रिरी फिल्म 'अजूबा' बनाने वाले शशि कपूर 1998 में रिलीज हुई अंग्रेजी फिल्म 'साइड स्ट्रेट्स' में अंतिम बार अभिनय करते हुए नजर आए थे। पिछले कुछ समय से वह अपनी बीमारियों की वजह से चर्चाओं में थे।
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