रीना रॉय के जीवन में ऐसा मोड़ आया कि उन्होंने फिर दोबारा सूरज को ढलने नहीं दिया। ‘नई दुनिया नए लोग’ की आउटडोर शूटिंग चल रही थी। पूरी यूनिट बंगलौर से पचास मील दूर एक जंगल में डेरा डाले थी। निकट से एक रेलवे लाइन गुजरती थी। सीन लेने की पूरी तैयारी हो चुकी थी, बस ट्रेन के आने का इंतजार था। सीन की बैकग्राउंड में एक ट्रेन चाहिए थी।
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फिल्म के निर्माता-निर्देशक बी.आर. इशारा ने रीना रॉय और सत्येन को बुलाकर समझाया- देखो, मेरे पास पैसा बिल्कुल खत्म है। यहां पर चौबीस घंटे में सिर्फ एक ट्रेन गुजरती है। ब्रांच लाइन है। तुम दोनों अपने-अपने डायलॉग अच्छी तरह दोहरा लो। ट्रेन के आने पर कुछ गड़बड़ हो गई तो मैं पूरे यूनिट को कल बंगलौर से यहां लाने का खर्चा बर्दाश्त नहीं कर सकता।
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रीना रॉय और सत्येन ने उन्हें विश्वास दिलाया कि ट्रेन आने दीजिए कोई गड़बड़ नहीं होगी। दूर से गाड़ी की सीटी सुनाई दी। पूरी यूनिट तैयार हो गई। गाड़ी नजदीक आई। रीना रॉय ने सत्येन की आंखों में देखा और अपना डायलॉग बोलने लगीं, लेकिन बीच में ही डायलॉग भूल गईं और गाड़ी गुजर गई। इशारा गुस्से में लाल पीले हो रहे थे।
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रीना की आंखों में आंसू आ गए, किन्तु गाड़ी तो गुजर चुकी थी। उनकी गैरजिम्मेदारी की हवा बंगलौर से मुंबई तक ऐसी फैली कि रीना रॉय के हाथ में आईं कई फिल्में दूसरी हीरोइनें मार ले गईं। रीना ने ये गाड़ी तो मिस कर दी थी मगर कमर कस ली कि अब वह अपनी एक्टिंग पर जी-जान से ध्यान देगी। इशारा की ही फिल्म ‘जरूरत’ का सीन था। इस बार मुकाबला सूरज के साथ था।
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ट्रेन भी चौबीस घंटे में एक बार आती थी, सूरज भी चौबीस घंटे में एक बार ढलता है। रीना बड़े आत्मविश्वास के साथ बोलीं, इशारा जी, विजय अरोड़ा को सीन अच्छी तरह समझा दीजिए, कहीं यह कोई गलती कर बैठें और हां, मेरा तो गलती करने का सवाल ही पैदा नही होता। मैंने बैंगलौर में गाड़ी गुजार दी थी, मगर इस बार सूरज को नहीं ढलने दूंगी और सचमुच ही रीना ने ढलते सूरज की बैक-ग्राउंड में एक जबरदस्त टेक दिया। फिल्म रिलीज हुई। बोल्ड दृश्यों के चलते बॉलीवुड में रीना छा गईं।