रानी मुखर्जी एक ऐसी अभिनेत्री हैं जिन्होंने परदे पर बहुत सी मजबूत लड़कियों और महिलाओं की जिंदगी को जिया है। रानी मानती हैं कि फिल्मों का समाज पर गहरा असर होता है और इसी वजह ने उन्हें परदे पर लड़कियों को सकारात्मक रूप से पेश करने की दिशा में योगदान देने की कोशिश करने का हौसला दिया है। रानी मुखर्जी ने एक खास बातचीत में ये भी साझा किया कि कि ऐसे हटकर किरदार निभाने के लिए उन्हें कौन सी चीज प्रेरित करती है।
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रानी मुखर्जी
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
रानी कहती हैं, “सिनेमा में सामाजिक बदलाव लाने की ताकत है और एक्टर्स के पास लोगों से संवाद करने व अपनी पसंद की फिल्मों के माध्यम से सकारात्मक बदलाव की सोच को आगे बढ़ाने की शक्ति है। एक कलाकार के तौर पर पर्दे पर सशक्त महिला किरदारों को निभाने का मौका मिलना मेरे लिए खुशकिस्मती की बात है। ईमानदारी से कहूं तो मैं दिल से ऐसे ही किरदार निभाना चाहती थी।”
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रानी मुखर्जी
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
रानी बताती हैं कि ऐसी भूमिकाएं और फिल्मों को चुनते वक्त उनके मन में एक खास प्लान रहता है। वह कहती हैं, मैं चाहती थी कि मेरा काम दुनिया को जोर-जोर से बोले कि मेरे ब्रांड के सिनेमा व मेरे किरदारों के साथ मेरी मंशा क्या है। आज मुझे खुशी है कि मैंने अच्छी फिल्मों का चयन किया। ऐसा मैं इसलिए कह रही हूं क्योंकि मैं समाज का ध्यान महिलाओं की तरफ मोड़ना चाहती थी।”
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रानी मुखर्जी
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
लगातार समय से आगे की भूमिकाएं चुनने के अपने फैसले को लेकर भी रानी बेहद खुश हैं। वह कहती हैं, ‘फिल्म ‘हम तुम’ की रिया हो, ‘युवा’ की शशि, ‘तलाश’ की रोशनी, ‘साथिया’ की सुहानी, ‘वीर जारा’ की सामिया, ‘ब्लैक’ की मिशेल, ‘नो वन किल्ड जेसिका’ की मीरा, ‘मर्दानी’ की शिवानी, ‘हिचकी’ की नैना या ऐसी ही अन्य बहुत सी भूमिकाओं ने महिलाओं को मजबूत, स्वतंत्र, आगे की सोच रखने वाले व्यक्तियों के रूप में पेश करने में अहम भूमिका निभाई है जो अपने दिल की बात सुनने में नहीं झिझकती हैं और सही चीज करती हैं।’
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रानी मुखर्जी
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
रानी अपनी पसंद का काम करने की वजह से आज एक संतुष्ट कलाकार हैं। वह कहती हैं, ‘मुझे गर्व है कि मैं ऐसे सिनेमा का हिस्सा रही हूं, जिसने महिलाओं को सही तरीके से प्रोजेक्ट करने की कोशिश की है। फिल्में सामाजिक धारणाओं को बदलने व सही बदलाव लाने में बड़ा रोल निभा सकती हैं।’ राष्ट्रीय बालिका दिवस पर रानी का मानना है कि सिनेमा में और सकारात्मक बदलाव लाने की क्षमता है जिससे महिलाओं को फायदा हो सकता है।