बॉलीवुड का हर निर्देशक यही चाहता है कि उसकी बनाई हुई फिल्मों को दर्शकों का जबरदस्त प्यार मिले। एक निर्देशक अपने जेहन में सोची गई कहानी को पर्दे पर उकेरता है और अभिनय के लिए उन सितारों को चुनता है जो उसकी कहानी में बिल्कुल फिट बैठते हैं। ये ही वजह है कि मेहनत से बनाई गई फिल्म को जबरदस्त प्रमोट भी किया जाता है और फैंस से उन्हें देखने की अपील भी की जाती है। हालांकि कई बार ऐसा होता है कि कुछ कहानियां दर्शकों को पसंद नहीं आती हैं और मेकर्स को इससे बड़ा नुकसान होता है।
फिल्म फ्लॉप होने से टूट गए थे राकेश ओमप्रकाश मेहरा
कई बार नुकसान सिर्फ पैसों और मेहनत का ही नहीं बल्कि उम्मीदों का भी हो जाता है। ऐसी ही एक फिल्म थी 'दिल्ली 6' जिसे निर्देशक राकेश ओमप्रकाश मेहरा ने बनाया था। फिल्म में अभिषेक बच्चन और सोनम कपूर ने काम किया था। फिल्म के गाने दर्शकों के बीच आज भी हिट हैं लेकिन फिल्म नहीं हिट हो पाई थी। 'रंग दे बसंती' जैसी सुपरहिट फिल्म देने वाले राकेश ओमप्रकाश मेहरा को इस फिल्म से काफी उम्मीदें थीं लेकिन दर्शकों को फिल्म अच्छी नहीं लगी।
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राकेश ओमप्रकाश मेहरा
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इस फिल्म के फ्लॉप होने पर राकेश ओमप्रकाश मेहरा पर क्या गुजरी थी इसका दर्द उन्होंने बयां किया।हाल ही में राकेश ओमप्रकाश मेहरा की ऑटोबायोग्राफी 'द स्ट्रेंजर इन द मिरर' रिलीज हुई। इस किताब को रीता राममूर्ति गुप्ता ने लिखा है। इस किताब में निर्देशक के करियर, निजी जिंदगी, सफलता और असफलता जैसे सभी किस्सों का जिक्र है।
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दिल्ली 6
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इस किताब में राकेश ओमप्रकाश मेहरा ने जिक्र किया है कि जब फिल्म दिल्ली-6 फ्लॉप हुई थी तो उन्हें गहरा धक्का लगा था। इस फिल्म के फ्लॉप होने के बाद राकेश ओमप्रकाश मेहरा शराब में इस कदर तक डूब गए थे कि खुद को खत्म कर देना चाहते थे। इस किताब में ओमप्रकाश मेहरा ने लिखा, 'फिल्म शुक्रवार 20फरवरी, 2009 को शानदार प्रतिक्रिया के साथ शुरू हुई। हमने रविवार तक 40 करोड़ से ज्यादा का कारोबार कर लिया। इसके बाद फिर सोमवार आया और दर्शक सिनेमाघरों से गायब हो गए और मैं बर्बाद हो गया था। बॉक्स ऑफिस पर हार और उसके साथ मेरे अपने संघर्ष ने मुझे झकझोर के रख दिया था। मुझे महसूस होने लगा कि क्या मैं लगातार बेहतरीन सिनेमा बनाने में सक्षम था? क्या रंग दे बसंती ढोंगी थी?
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राकेश ओमप्रकाश मेहरा
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दिग्गज निर्देशक ने आगे लिखा, 'मै मरने तक शराब पीना चाहता था। मैं कभी ना उठने के लिए सोना चाहता था। मैं मेरी पत्नी और बेटी को दर्द दे रहा था। हमारे बीच चीजें खराब हो रही थीं। मैं उन लोगों के प्रति लापरवाह और असंवेदनशील रहा जिन्हें मैं सबसे ज्यादा प्यार करता था। इसके बाद मेरी पत्नी ने इस दर्द से बाहर निकलने में मेरी मदद की और मैंने फिल्म के सिनेमेटोग्राफर बिनोद प्रधान को बुलाया'।
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राकेश ओमप्रकाश मेहरा
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बिनोद ने ओमप्रकाश को फिल्म की कहानी के मूल स्क्रिप्ट के बारे में बताया जिसमें अभिषेक के किरदार को पीट पीटकर मार डाला जाता है जो कि सिनेमाघरों में जारी संस्करण में प्रदर्शित होता है। दोनों ने फिल्म के अंत पर फिर से काम किया और इसे वेनिस फिल्म फेस्टिवल में भेजा गया जहां इस फिल्म को दो पुरस्कार से सम्मानित किया गया।