राजेश खन्ना...ये सिर्फ एक नाम नहीं है बल्कि ये भारतीय सिनेमा की पहचान हैं। राजेश खन्ना भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के पहले सुपरस्टार हैं जिन्हें दर्शकों का सबसे ज्यादा प्यार मिला। राजेश खन्ना के लिए जैसी दीवानगी देखी गई वह किसी और को नसीब ही नहीं हुई। राजेश खन्ना के लिए कहा जाता था ऊपर आका नीचे काका...। काका ने बैक टू बैक 15 सुपरहिट फिल्में दी थी जिसका रिकॉर्ड आज तक कोई नहीं तोड़ पाया। उनके करियर ने 1970 की शुरुआत में उड़ान भरी थी। फिल्म अराधना और दो रास्ते रिलीज हुई थी जिसने उन्हें सुपरस्टार का तमगा भी दे दिया था।
अंतिम दिनों में ऐसे हो गए थे काका
काका के बारे में सलीम खान ने कहा था, '1969-1975 तक मैंने उनके सुपर स्टारडम को बेहद करीब से देखा था लेकिन मुझे ये कहने में कोई झिझक नहीं कि जिस ऊंचाई को उन्होंने छुआ वहां उनके बाद हिंदी सिनेमा का कोई सितारा नहीं पहुंचा। राजेश खन्ना के फैंस 6 से 60 साल के उम्र वाले हुआ करते थे जिसमें लड़कियों के बीच एक अलग ही क्रेज था। हालांकि जिस तेजी से वो ऊपर उठे थे उतनी ही तेजी से वो नीचे भी आने लगे थे। अपने जीवन के अंतिम दिनों में उनकी हालत बिल्कुल अजीब हो गई थी'।
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राजेश खन्ना
- फोटो : सोशल मीडिया
राजेश खन्ना की फिल्में जब फ्लॉप होने लगी तो ये उनके लिए किसी सदमे की तरह था। अपने करियर के ढलान पर वो बिल्कुल अकेले पड़ गए थे। उनके करियर के खत्म होने की एक नही बल्कि कई वजह थी। जिंदगी के तनाव, इंडस्ट्री के लोगों के साथ उनका व्यवहार और कुछ नया ना करना। राजेश खन्ना फिल्मों में एक्सप्रेशन के लिए मशहूर थे लेकिन बदलते वक्त के साथ लोगों को एक्शन पसंद आने लगा था जो राजेश खन्ना ने कभी नहीं किया।
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राजेश खन्ना
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धीरे धीरे उनकी तबीयत भी खराब होने लगी और साल 2011 में उनकी हालत काफी नाजुक हो गई। वो बिस्तर पर चले गए और काफी कमजोर हो गए। चर्चित लेखक और पत्रकार यासिर उस्मान राजेश खन्ना की जीवनी में लिखते हैं कि राजेश खन्ना ने पूरी उम्र शराब पी लेकिन जीवन के इस मुकाम पर आकर उन्होंने शराब छोड़ दी थी। उनका लीवर लगभग खत्म हो गया था।
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राजेश खन्ना
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जब राजेश खन्ना का चेकअप कराया गया तो डॉक्टरों ने उन्हें बताया कि उन्हें कैंसर हो गया है। उस्मान लिखते हैं जब लीलावती अस्पताल के डॉक्टरों ने बताया कि काका का कैंसर एडवांस स्टेज में पहुंच गया है तो वो कुछ देर के लिए खामोश हो गए। थोड़ी देर बाद उन्होंने अपने आपको संभालते हुए कहा था- मेरी किस्मत में आनंद की तरह ही जीना लिखा है।
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राजेश खन्ना के करीबी दोस्तों में भरत उपमन्यु भी शामिल थे जो ज्योतिषि थे। काका हर फैसला उनसे पूछ कर करते थे। जब राजेश खन्ना को उनकी बीमारी के बारे में पता चला था तो उन्हें लंबे समय तक उम्मीद थी कि वो ठीक हो जाएंगे। कोई ना कोई चमत्कार जरूर होगा लेकिन फिर उन्हें अंदाजा हो गया कि अब उनका आखिरी पल करीब है।काका अपने डॉक्टरों से पूछा करते थे- मेरा वीजा कब खत्म हो रहा है? इस दौरान उनके चेहरे पर एक दुखभरी मुस्कान दिखती थी। 18 जुलाई 2012 को राजेश खन्ना हमेशा से इस दुनिया से चले गए थे।