नवाजुद्दीन सिद्दकी की फिल्म मंटो हर तरफ चर्चा में बनी हुई है। दरअसल फिल्म की डायरेक्टर नंदिता दास 'मंटो' से जुड़ी एक किताब के कवर पेज को लेकर सवालों के कटघरे में हैं। बीते दिनों रिलीज हुआ 'मंटो' का ट्रेलर दर्शकों को काफी पसंद आया है। फैंस इस फिल्म के रिलीज होने का इंतजार कर रहे हैं।
नंदिता की फिल्म में मंटो की भूमिका में हैं नवाजुद्दीन सिद्दीकी। इस फिल्म के दौरान नंदिता दास ने 'मंटो' की 15 कहानियों का संकलन और संपादन कर एक किताब भी रिलीज कर दी है। किताब रिलीज के बाद से ही विवादों में आ गई है। दरअसल किताब के कवर पेज पर मंटो की जगह नवाजुद्दीन सिद्दीकी की फोटो है। इस बात को लेकर नंदिता दास और नवाज निशाने पर हैं।
हिंदी साहित्यकारों को यह बात बिल्कुल नहीं भा रही है। तमाम साहित्यकार इसे एक ईमानदार लेखक की हत्या कह रहे हैं। साहित्यकारों ने नंदिता और किताब पब्लिश करने वाली कंपनी को आड़े हाथ लेकर सवाल किया है कि उर्दु लेखक सआदत हसन मंटो बड़े हैं या फिल्म में उनकी भूमिका निभाने वाले अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दीकी। सोशल मीडिया पर साहित्यकारों का आरोप हैं कि यह सब किताब बेचने के हथकंडे हैं।
यह फिल्म और किताब 21 सितंबर को देशभर में रिलीज़ की जाएगी। फिल्म में नवाज के अलावा ऋषि कपूर, परेश रावल, जावेद अख्तर, ईला अरुण, रसिका दुग्गल, राजश्री देशपांडे, गुरदास मान, दिव्या दत्ता, रणवीर शौरी और ताहिर राज भसीन भी अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे। फिल्म की डायरेक्टर नंदिता दास ने बताया कि इस फिल्म के लिए नवाज ने 1 रुपया बतौर फीस लिया।
आपको बता दें कि सआदत हसन मंटो का जन्म 11 मई 1912 में लाहौर में हुआ था। बतौर लेखक उन्होंने करीब 22 लघु कथा संग्रह, एक उपन्यास, रेडियो नाटकों के संग्रह भी प्रकाशित किए थे। ठंडा गोश्त, टोबा टेक सिंह, खोल दो और बू जैसी कई शानदार रचनाएं की हैं। उनकी लेखनी पर अश्लीलता के भी आरोप लगे हैं। नवाजुद्दीन सिद्दीकी की इस फिल्म में मंटो की जिंदगी से जुड़े इन्हीं कुछ खास घटनाओं को दिखाया गया है।