हिंदी सिनेमाजगत में चार दशक से भी ज्यादा समय तक लोगों के दिलों पर कब्जा जमाने वाले मशहूर गायक मुहम्मद रफी की 31 जुलाई को डेथ एनिवर्सरी है। मुहम्मद रफी बॉलीवुड का वह कोहिनूर है जिसकी चमक से आज भी बॉलीवुड की गलियां रौशन हैं। मोहम्मद रफी के गाने आज भी लोगों की जुबां पर आते ही मानों समा सा बन जाता है। वैसे तो मुहम्मद रफी के ज्यादातर गाने सुपरहिट रहे लेकिन उनके गाए कुछ नगमें आज भी दिल की धड़कनों को बढ़ा देते हैं। ये गाने हैं आज मौसम बड़ा बेईमान है, तारीफ करूं क्या उसकी, चाहूंगा मैं तुझे, अभी ना जाओ छोड़कर। तो चलिए आपको फिल्म इंडस्ट्री के महान गायक मुहम्मद रफी से जुड़े कुछ अनसुने किस्से बताते हैं।
बहुत ही कम लोग इस बात को जानते हैं कि मधुर आवाज के धनी मोहम्मद रफी को प्यार से लोग 'फेकू' कहकर बुलाते थे।
कहा जाता है कि रफी साहब ने अपने गांव में फकीर के गानों की नकल करते-करते गाना गाना सीखा था। मोहम्मद रफी ने अपनी पहली परफॉर्मेंस बतौर गायक 13 साल की उम्र में दी थी। के एल सहगल ने उन्हें लाहौर में एक कंसर्ट में गाने की अनुमति दी थी।
साल 1948 में मुहम्मद रफी ने राजेन्द्र कृष्णन द्वारा लिखा हुआ गीत 'सुन सुनो आए दुनिया वालों बापूजी की अमर कहानी' गाया था। यह गाना देखते ही देखने इतना बड़ा हिट हो गया था कि तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने उन्हें अपने घर पर यह गाना गाने के लिए निमंत्रण दिया था।
मुहम्मद रफी के निधन के दिन मुंबई में तेज बारिश हो रही थी। कहा जाता है कि निधन की अंतिम यात्रा की रिकॉर्डिंग को हिंदी फिल्म में इस्तेमाल भी किया गया है। मुहम्मद रफी की अंतिम यात्रा इतने बड़ी स्तर पर की गई थी कि लोग आज भी याद करते है। उस वक्त करीब 10 हजार लोग यात्रा में शरीक हुए थे।