न इंतजार, न आहट, न तमन्ना, न उम्मीद, जिंदगी है कि यूं बेहिस हुई जाती है... जिसकी लेखनी में इतना दर्द हो उसकी जिंदगी में कितना दर्द होगा इसकी महज कल्पना की जा सकती है। पर्दे से लेकर निजी जिंदगी तक अपने नसीब में बेहिसाब दर्द बटोरने वाली ये लाइन अभिनेत्री मीना कुमारी की कलम से निकली थी। सिर्फ यही ही नहीं उन्होंने अपने जिंदगी के हर दर्द को एक शायरी का रूप दिया था। 1 अगस्त 1932 को महजबीन बानो के रूप में जन्मीं मीना कुमारी इंडस्ट्री में ट्रेजेडी क्वीन के नाम से मशहूर हुई थीं।
बेहद दर्दभरी रही मीना कुमारी की जिंदगी
ये एक अजीब किस्म का इत्तेफाक था कि निजी जिंदगी में जिस दर्द को वो पालती रहीं वो ही पर्दे पर उनकी कामयाबी की वजह भी बना। पिता अली बख्श और मां इकबाल बेगम के घर जन्मीं मीना को दुनिया में आते ही मुश्किलों का सामना करना पड़ा था। उनके माता पिता उन्हें पालने के हालत में नही थे। उनके पिता ने उन्हें यतीमखान के बाहर सीढ़ियो पर छोड़ दिया था और जैसे ही आगे बढ़े नन्ही बेटी की चीखती आवाजों ने उनके कदम रोक दिए थे। मीना के पिता से बेटी को छोड़ा ना गया और वो उन्हें घर ले आए।
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मीना कुमारी
- फोटो : फाइल
किसी तरह महजबीन के माता पिता ने उनकी परवरिश की। वो बहुत छोटी थी तभी अपने घर की हालत समझ गईं। अपने घर की आर्थिक स्थिति को संभालने के लिए वो सात साल की उम्र से ही काम करने लगीं। उस वक्त वो बेबी मीना के नाम से जानी जाती थीं और फिल्म 'फरजद-ए-हिंद' में नजर आईं थीं।उन्होंने कई फिल्में की लेकिन उन्हें पहचान मिली साल 1952 में आई फिल्म 'बैजू बावरा' से।इस फिल्म के लिए उन्हें बेस्ट एक्ट्रेस का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला।
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मीना कुमारी
- फोटो : सोशल मीडिया
मीना कुमारी की जिंदगी में मर्द भी आए और मोहब्बत भी लेकिन कोई उन्हें सुकून ना दे सका। कमाल अमरोही मीना कुमारी को लेकर फिल्म बनाना चाहते थे लेकिन मीना उनके स्वभाव से परिचित थीं ऐसे में उन्होंने फिल्म करने से मना कर दिया था। जब ये बात कमाल अमरोही को पता चली तो उन्होंने मीना को मनाकर फिल्म साइन करवा ली। हालांकि ये फिल्म कभी बनी नहीं। फिल्म भले ही नही बन पाई लेकिन मीना और कमाल के बीच प्यार की शुरूआत हो गई।
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मीना कुमारी
- फोटो : सोशल मीडिया
मीना कमाल से प्यार करने लगी थीं लेकिन अपने पिता के खिलाफ जाकर उनसे शादी करने की उनके अंदर हिम्मत नहीं थी। ऐसे में दोनों की शादी एक क्लिनिक में दो घंटे के अंदर करवाई गई थी। दरअसल मीना की फिजियोथैरिपी चल रही थी। उनके पिता मीना को उनकी बहन के साथ क्लिनिक छोड़ आते थे और फिर दो घंटे बाद लेने आते थे। ऐसे में 14 फरवरी 1952 को इस दो घंटे के बीच दोनों की चोरी छिपे शादी हुई थी। कुछ समय तक उनके अब्बा को कुछ भी पता नहीं चला लेकिन जिस दिन पता चला उस दिन उन्होंने इस निकाह को मानने से इनकार कर दिया।
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मीना कुमारी
- फोटो : सोशल मीडिया
दूसरी तरह जब इस बारे में कमाल अमरोही की पत्नी को पता चला तो वो अपने बच्चों को लेकर गांव अमरोहा चली गईं। सभी कमाल पर दबाव बनाने लगे कि वो मीना को तलाक दें। अपनी पहली शादी बचाने के लिए कमाल ने मीना को खत लिख दिया की इस निकाह को एक भूल समझकर खत्म कर दें। इसके जवाब में मीना ने लिखा, 'मुझे लगता है कि आप मुझे समझ नहीं पाए और समझ भी नहीं पाएंगे। बेहतर होगा कि आप मुझे तलाक दे दें'। इसके बाद दोनों अपने काम में व्यस्त हो गए।