''है प्रीत जहां की रीत सदा.. मै गीत वहां के गाता हूं भारत का रहने वाला हूं.. भारत की बात सुनाता हूं।'' ये गीत शायद ही किसी ने न सुना हो, देशभक्ति से लबरेज फिल्मों में अभिनय करने वाले मनोज कुमार उर्फ भारत कुमार को कौन नहीं जानता। हिंदी सिनेमा के लीजेंड बन चुके मनोज कुमार का असली नाम हरिकिशन गिरी गोस्वामी था। जीहां, यही था मनोज कुमार का असली नाम। हिंदी सिनेमा के अभिनेता मनोज कुमार 24 जुलाई को अपनी जन्मदिन मनाते हैं।
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इंडस्ट्री छोड़ना चाहते थे अमिताभ, अगर न मिलता मनोज कुमार का सहारा तो सुपरस्टार न होते बिग बी
Tue, 23 Jul 2019 07:07 PM IST
अपूर्वा राय
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
Published by: अपूर्वा राय
Updated Tue, 23 Jul 2019 07:07 PM IST
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अमिताभ बच्चन, मनोज कुमार
- फोटो : Twitter
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मनोज कुमार
मनोज कुमार की बात हो और दिलीप कुमार का जिक्र न हो ये कैसे हो सकता है। मनोज के बचपन का एक वाकया है। स्कूल में पढ़ाई के दौरान मनोज, दिलीप कुमार की फिल्म 'शबनम' देखने गए और फिर उनके किरदार से इतने प्रभावित हो गए कि उसी किरदार के नाम पर उन्होंने अपना नाम मनोज कुमार रख लिया।
मनोज कुमार
ऐसे वक्त में जब लोग किसी एक्टर को रोमांटिक छवि में देखना पसंद कर रहे थे, उस वक्त मनोज कुमार ने देशभक्ति फिल्मों की ओर रुख किया। ज्यादातर फिल्मों में उनके किरदार का नाम भारत था, इस वजह से लोग उन्हें 'भारत कुमार' भी कहने लगे। 1957 में बतौर अभिनेता फिल्म 'फैशन' से अपना करियर शुरू किया। हिंदी सिनेमा में भारत कुमार के नाम से मशहूर अभिनेता मनोज कुमार जितने अच्छे अभिनेता अपने जमाने में थे, उससे कहीं ज्यादा समझ उन्हें फिल्म मेकिंग को लेकर थी।
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मनोज कुमार
देशभक्ति को लेकर मनोज कुमार में एक ऐसी अलख थी जिसको उन्होंने अपनी फिल्मों के जरिए लोगों के सामने लाकर दिखाया। मनोज कुमार ने देशभक्ति फिल्में बनाकर ये साबित किया कि ऐसी फिल्मों से भी पैसा कमाया जा सकता है। फिल्म 'शहीद' के बारे में ये कहा जाता है कि इस फिल्म में मनोज कुमार शहीद भगत सिंह की भूमिका निभाने वाले थे, इस फिल्म के लिए मनोज भगत सिंह की मां से भी मिलने पहुंच गए थे। सभी जरूरी जानकारी के बाद जब मनोज कुमार ने इसमे अभिनय किया और फिल्म रिलीज हुई तो बॉक्स ऑफिस पर 1965 के शहीद ने धमाल मचा दिया। लोगों ने मनोज कुमार के अभिनय को खूब पंसद किया, इसके बाद मनोज कुमार ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। यहां तक कि फिल्म शहीद का गाना भी मनोज कुमार के ही कहने पर गीतकार प्रेम धवन ने लिखा था।
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अमिताभ, मनोज कुमार
लगातार फ्लॉप होती फिल्मों से परेशान जब अमिताभ बच्चन मुंबई छोड़कर अपने मां-बाप के पास दिल्ली वापस जा रहे थे तब मनोज कुमार ही ऐसे थे जिन्होंने अमिताभ को रोका और अपनी फिल्म 'रोटी, कपड़ा और मकान' में मौका दिया। अमिताभ ने 'जंजीर' से पहले 'रोटी कपड़ा और मकान' साइन की थी। एक कहानीकार के रूप में केवल 11 रुपए लेने वाले मनोज कुमार को फिल्मों में उनके बेहतरीन अभिनय के लिए दादा साहब फाल्के, पद्मश्री, फिल्मफेयर लाइफ टाइम अचीवमेंट जैसे अवार्ड्स से सम्मानित किया जा चुका है।