फिल्म 'शोले' पर्दे पर देखने पर जितनी चटपटी लगती है इसके बनने की कहानी भी उतनी ही मजेदार है। शोले बनने से पहले ही यह अपनी स्टारकास्ट के चयन की वजहों से खूब चर्चा में रही थी। 'शोले' फिल्म की पटकथा सलीम-जावेद ने लिखी है। पटकथा लिखते समय यह तय नहीं हुआ था कि कौन सा किरदार कौन करेगा।
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शोले
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
पटकथा पूरी होने के बाद फिल्म निर्देशक रमेश सिप्पी ने सबसे पहले संजीव कुमार और अमिताभ बच्चन को कास्ट किया। स्क्रिप्ट सुनने के बाद इन दोनों ही कलाकारों को अपना नहीं बल्कि गब्बर का चरित्र रास आ रहा था। इन दोनों ही कलाकारों ने बारी-बारी से गब्बर वाला किरदार करने की चाहत दिखायी। उस समय फिल्म के लिए गब्बर का चुनाव नहीं हुआ था।
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शोले
- फोटो : सोशल मीडिया
रमेश शिप्पी ने बातों ही बातों में इन दोनों को साफ कर दिया कि उनकी निगाह में फिल्म का गब्बर कोई और है। डैनी उस समय एक शीर्ष खलनायक के किरदार में काफी मशहूर थे। गब्बर की यह भूमिका उन्हें ऑफर की गई। वहीं डैनी को भी यह भूमिका अच्छी लगी और उन्होंने इस रोल को करने के लिए हामी भर दी। कुछ समय के बाद डैनी ने तारीखों की समस्या बताते हुए यह रोल करने से मना कर दिया।
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गब्बर
- फोटो : सोशल मीडिया
बस फिर क्या था गब्बर की तलाश एक बार फिर शुरू हो गई। किसी ने रमेश सिप्पी को अमजद खान का नाम सुझाया। अमजद उस समय फिल्मों में सक्रिय नहीं हुए थे। वह थिएटर कर रहे थे। हालांकि उन्हें एक छोटे बजट की फिल्म 'लव एंड गॉड' मिल गई थी लेकिन इस फिल्म का निर्माण होना अभी शुरू नहीं हुआ था। अमजद ने यह भूमिका करनी स्वीकार कर ली। इस तरह अमजद हमेशा के लिए याद रह जाने वाले किरदार गब्बर के लिए चुने गए।
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गब्बर की तलाश पूरी हो जाने के बाद बसंती के चुनाव की बारी आई। बसंती को चुनने में कोई खास दिक्कत नहीं हुई। रमेश सिप्पी ने पहले से मन बना लिया था कि वह इस भूमिका के लिए वह हेमा मालिनी को ही लेंगे। हेमा इसके लिए राजी भी हो गईं। अब फिल्म के वीरू की तलाश थी। इस भूमिका के लिए धर्मेंद्र से बात की गई। पटकथा सुनने के बाद धर्मेंद्र को वीरू के बजाय ठाकुर वाली भूमिका रास आई। ठाकुर वाली भूमिका के लिए संजीव कुमार फाइनल हो चुके थे। धर्मेंद्र इस बात पर अड़े रहे कि वह ठाकुर की भूमिका करना चाहते हैं।