शब्दों के शहंशाह, बेहतरीन कॉमेडियन, दिग्गज कलाकार और कला के सच्चे उपासक कादर खान का आज जन्मदिन है। 1973 में फिल्म दाग से पर्दे पर कदम रखने वाले कादर साहब ने 300 से ज्यादा फिल्मों में काम किया। पर्दे पर उनकी आंखों में आंसू देखकर दर्शक रोता था, उनकी कॉमेडी से सिनेमा हॉल हंसी से गुंजता था, उनके लिखे डायलॉग को सुनकर तालियां पिटती थीं। न जाने कितने अभिनेताओं को उन्होंने सिनेमा का सरताज बनाया लेकिन जिंदगी के अंतिम दिनों में उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं था। 31 दिसंबर 2018 को कादर खान का निधन हो गया था।
स्पॉटब्वॉय की रिपोर्ट के मुताबिक, निधन के कुछ देर पहले ही कादर साहब कोमा में चले गए थे । उन्होंने मौत से पांच दिन पहले खाना खाया था। ये खाना कादर खान की बहू साहिस्ता यानी सरफराज की पत्नी ने बनाया था। इसके बाद उन्होंने अस्पताल का खाना खाने से मना कर दिया था। साहिस्ता ने उन्हें समझाया कि उनके लिए खाना बहुत जरूरी है लेकिन कादर कुछ भी खाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे थे।
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kader khan amitabh bachchan
कादर खान किसी भी बात का जवाब देने के लिए सिर्फ आंखों से इशारा कर रहे थे । यही कादर साहब के आखिरी शब्द भी थे। कादर खान के दोस्त ने कहा था, 'वो एक असली पठान थे। 5 दिन तक उन्होंने ना कुछ खाया और ना पानी पिया । इसके बावजूद वो 120 घंटे तक जिंदगी से जंग लड़ते रहे। ये हर किसी के बस की बात नहीं थी ।'
कादर खान को अभिनय करना अच्छा लगता है। वो कॉलेज के समय में अभिनय में भाग लिया करते थे। एक बार दिलीप कुमार ने उनका अभिनय देखा और उन्हें बहुत अच्छा लगा। इसके बाद दिलीप कुमार ने कादर खान से अपनी फिल्मों में काम करने के लिए बोला। कादर खान की पहली फिल्म 'दाग' थी, इसमें वो वकील के किरदार में नजर आए थे।
कादर खान ने उस दौर की हिट फिल्म 'रोटी' के डायलॉग्स लिखे थे। इस फिल्म के लिए मनमोहन देसाई ने उन्हें एक लाख 20 हजार रुपए की फीस दी थी। उस दौर में यह फीस बहुत बड़ी थी। कादर खान ने फिल्मों के अलावा कई टीवी शो में भी काम किया है। उनका शो 'हंसना मत' काफी लोकप्रिय हुआ था। कादर खान को 9 बार बेस्ट कॉमेडियन के लिए नॉमिनेट किया गया है।
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