जिस तमिल फिल्म ‘लव टुडे’ (2022) की ‘लवयापा’ रीमेक है, वह आपने पहली बार कब देखी? और, इस फिल्म की कौन सी खासियत ऐसी है जिसने आपको इसका हिंदी रीमेक करने के लिए उत्साहित किया?
फिल्म के निर्माता मधु मंटेना ने मूल फिल्म के अधिकार खरीदे थे और मुझसे मुलाकात में उन्होंने ये फिल्म देखने की गुजारिश की। मैंने फिल्म देखी तो मुझे ये काफी पसंद आई। फिल्म के वन लाइनर (एक लाइन में फिल्म की कहानी बताना) पर मैं मोहित हो गया था कि क्या हो अगर शादी से पहले लड़के और लड़की को अपने मोबाइल फोन की अदला-बदली करने को कहा जाए? मेरा मानना है कि प्रेम में जो बाधाएं आती हैं, वे अधिकतर हमारी खुद की बनाई हुई होती हैं।
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जुनैद खान
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
आपका जीवन मोबाइल पर कितना आधारित है? क्या लगता है कि बिना मोबाइल के भी आप रह सकते हैं?
हां, मुझे लगता है कि बिना मोबाइल के मेरा काम चल सकता है। मुझे मेरा पहला मोबाइल तब मिला था जब मैं 16 साल का था और वह भी बहुत बेसिक मोबाइल था, सिर्फ फोन कर सकने लायक। लेकिन, मोबाइल जरूरत तब बना, जब हमने इस पर वे सारे काम भी करने शुरू कर दिए जो पहले हम मोबाइल पर नहीं करते थे। जैसे मैं अब किताबें भी मोबाइल पर पढ़ता हूं। फिल्म की स्क्रिप्ट्स भी मोबाइल पर आने लगी हैं। फिल्म की शूटिंग चल रही हो तो उसके गाने और भी तमाम सारी चीजें पहले मेरे मोबाइल पर ही आती हैं।
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फिल्म 'महाराज' में जुनैद खान
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
तो कागज का प्रयोग किए हुए कितना समय हो चुका है आपको? कब कुछ लिखा था आखिरी बार या पढ़ा था?
हां, अगर हस्ताक्षर की गिनती न करें तो वाकई मुझे किसी कागज पर कुछ लिखे हुए या कुछ पढ़े हुए काफी अरसा हो गया है। लेकिन हां, नाटकों की रिहर्सल हम अब भी कागज से ही करते हैं, उससे एक लय बनी रहती है। रही बात लिखने की तो मुझे याद आता है कि फिल्म ‘महाराज’ का जो मेरा मोनोलॉग है, उसे याद करने के लिए मैंने लिखकर याद करने की शैली का सहारा लिया था। उसे लिखा भी मैंने देवनागरी में ही था।
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जुनैद खान और खुशी कपूर फिल्म में 'लवयापा'
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
वाह, तो फिर हिंदी नाटक भी आपने किए होंगे, या पढ़े होंगे?
नहीं, नाटकों के मंचन की जहां तक बात है तो वे तो मैंने अधिकतर अंग्रेजी या मिश्रित भाषा में ही किए हैं। लेकिन हां, मुझे हिंदी के नाटक पढ़ना बहुत पसंद है। ‘अंडे के छिलके’ एकांकी नाटक मुझे बहुत पसंद है। कृश्न चंदर की ‘एक गधे की आत्मकथा’ पढ़ना मुझे बहुत अच्छा लगता है।
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जुनैद के पिता आमिर खान और सौतेली मां किरण राव
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
और, अपने माता-पिता का कितना सहयोग मिला आपको अभिनेता बनने में?
मेरे माता-पिता (रीना दत्ता-आमिर खान) ऐसे अभिभावक हैं, जिनसे मैं कोई भी बात साझा कर सकता हूं। हमारे बीच इतना विश्वास है कि हमारे बीच कुछ छुपा नहीं। मेरी परवरिश बहुत ही सामान्य तरीके से हुई। स्कूल मेरा यहीं पापा के ऑफिस के पास था। कॉलेज पढ़ने मैं लोकल ट्रेन से जाता था और फिर कॉलेज के बाद जब अभिनय की बारी आई तो पापा ने ही सलाह दी कि मैं थियेटर में मास्टर्स करूं। इसके लिए मैं अमेरिका गया। लौटकर आया तो यहां पहला नाटक ‘मदर करेज एंड हर चिल्ड्रेन’ किया जिसमें मैं अरुंधति नाग का बेटा बना था।