अपनी एक्टिंग से जिंदगी भर सभी को गुदगुदाने वाले जॉनी वॉकर की पुण्यतिथि 29 जुलाई को है। जॉनी वॉकर का असली नाम बदरुद्दीन जमालुद्दीन था। 50 और 60 के दशक में उन्होंने हिंदी सिनेमा को कई यादगार किरदार दिए जो आज भी लोगों के जेहन में है।
जॉनी वॉकर का जन्म मध्य प्रदेश के इंदौर में हुआ था। मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखने वाले जॉनी वॉकर का बचपन काफी कठिनाइयों के बीच बीता। उनके पिता इंदौर में ही एक मिल में मजदूरी करते थे। जॉनी वॉकर भी उनके काम में मदद करते थे। बाद में मिल बंद होने के चलते उनका पूरा परिवार 1942 में मुंबई आ गया।
जॉनी वॉकर 10 भाई-बहनों में दूसरे नंबर पर थे। पिता के साथ घर की भरण पोषण की जिम्मेदारी उनकी भी थी। काफी कोशिशों के बाद जॉनी वॉकर को उनके पिता के जानने वाले पुलिस इंस्पेक्टर की सिफारिश पर बस कंडक्टर की नौकरी मिल गई जिसके बदले में उन्हें 26 रुपये हर महीने मिलते थे।
नौकरी मिलने के बाद जॉनी वॉकर काफी खुश थे क्योंकि इसके जरिए वो मुंबई के स्टूडियो भी घूम लेते थे। एक दिन उनकी मुलाकात डायरेक्टर के. आसिफ के सचिव रफीक से हुई। उनके कई बार गुजारिश के बाद फिल्म 'आखिरी पैमाने' में एक छोटा सा रोल मिला। उस रोल के लिए जॉनी वॉकर को 80 रुपये मिले।
उस वक्त एक्टर बलराज साहनी की नजर जॉनी वॉकर पर पड़ी। उन्होंने जॉनी को गुरु दत्त से मिलने की सलाह दी। बस फिर क्या था उन्होंने गुरु दत्त के सामने शराबी की एक्टिंग की जिसे देखकर गुरु दत्त को वाकई लगा कि उन्होंने शराब पी रखी है। पहले तो गुरु दत्त बहुत नाराज हुए कि उन्होंने शराब पी रखी है लेकिन बाद में जब उन्हें पता चला तो जॉनी को गले लगा लिया। कहा जाता है गुरु दत्त ने उन्हें एक लोकप्रिय व्हिस्की ब्रांड के नाम पर यह नाम दिया था। जबकि फिल्मों में अक्सर शराबी का रोल करने वाले जॉनी वॉकर असल जिंदगी में बिल्कुल भी शराब नहीं पीते थे।