बॉलीवुड के बैड ब्वॉय कहे जाने वाले संजय दत्त का जन्म 29 जुलाई 1959 को मुंबई में हुआ था। दिग्गज एक्टर सुनील दत्त और नरगिस के बेटे संजय दत्त अपने घर में सबसे लाडले थे शायद यही वजह है कि कई ऐसी बुरी आदतें उन्हें लग गई जिसकी सजा भी उन्हें भुगतनी पडी़। आज हम उनकी जिंदगी का एक ऐसा ही किस्सा बताने जा रहे हैं जिसने संजय दत्त की पूरी जिंदगी ही बदल दी।
1993 में मुंबई बम ब्लास्ट केस में संजय दत्त का नाम आने से उस वक्त हर कोई हैरान रह गया। ब्लास्ट के बाद पुलिस को पता चला कि इसमें बॉलीवुड के भी कुछ लोग हो सकते हैं। बस फिर क्या था पुलिस ने प्रोड्यूसर हनीफ कड़ावाला और समीर हिंगोरा को पुलिस स्टेशन बुलाया और पूछताछ शुरू की। इस दौरान संजय दत्त दोनों की प्रोड्यूस की हुई फिल्म 'सनम' में काम कर रहे थे।
पुलिस ने जब हनीफ कड़ावाला से पूछताछ शुरू की तो पहले तो वो कोई भी जवाब देने से बचता रहा लेकिन पुलिस के सामने उसकी ज्यादा नहीं चली। बाद में उसने एक के बाद एक कड़ी खोल दिए। हनीफ ने कहा, 'पुलिस हमेशा हम जैसी छोटी मछलियों को परेशान करती है जबकि बड़े लोग तो यूं ही घूमते रहते हैं।' ये बड़ा आदमी कोई और नहीं बल्कि संजय दत्त थे।
मुंबई बम ब्लास्ट के बाद पुलिस ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई। तभी एक पत्रकार ने पुलिस से पूछा कि क्या इसमें संजय दत्त भी शामिल हैं। दरअसल, पत्रकार ने यह सवाल महज तुक्के के आधार पर पूछा था इसके पीछे की वजह यह थी कि उस वक्त संजय दत्त हनीफ-समीर की प्रोड्यूस की हुई फिल्म कर रहे थे। जब पत्रकार के सवाल का जवाब पुलिस टालने लगी तो कईयों को शक हुआ। बस यहीं से संजय दत्त पर शक की सुई घूमी।
अगले दिन सभी अखबारों के पहले पन्ने पर पुलिस के प्रेस कॉन्फ्रेंस की खबर छपी थी। मॉरीशस में फिल्म 'आतिश' की शूटिंग खत्म कर जब संजय दत्त एयरपोर्ट पहुंचे तो 100 पुलिसवाले उन्हें गिरफ्तार करने के लिए खड़े थे। संजय दत्त को सीधे वहां से मुंबई क्राइम ब्रांच ले जाया गया।