इरफान खान ने बॉलीवुड ही नहीं हॉलीवुड तक में अपने अभिनय की छाप छोड़ी है। उन्होंने अपने अभिनय से हर वर्ग के दर्शकों को प्रभावित किया है। कहते हैं कि अभिनय में सबसे अहम रोल आंखों का होता है और एक शानदार कलाकार वही है जिसे अपनी आंखों से संवाद करना आता हो। ऐसा लगता था कि इरफान को यह कला जन्म से ही मिली हुई है। 29 अप्रैल को अभिनेता इरफान खान की पहली पुण्यतिथि है। आइए इस खास मौके पर उनसे जुड़ी कुछ खास बाते जानते हैं।
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इरफान खान
- फोटो : Instagram
इरफान का जन्म राजस्थान के जयपुर में एक मुस्लिम पठान परिवार में हुआ था। पठान परिवार के होने के बावजूद इरफान बचपन से ही शाकाहारी थे। इस वजह से उनके पिता उन्हें हमेशा यह कहकर चिढ़ाते थे कि पठान परिवार में ब्राह्मण पैदा हो गया। इंडस्ट्री में आने के बाद इरफान ने काफी संघर्ष किया। जब उनका एनएसडी में प्रवेश हुआ, उन्हीं दिनों उनके पिता की मृत्यु हो गई। जिसके बाद इरफान को घर से पैसे मिलने बंद हो गए। एनएसडी से मिलने वाली फेलोशिप के जरिए उन्होंने अपना कोर्स खत्म किया।
बता दें कि बॉलीवुड की दुनिया में अपनी अदाकारी के लिए मशहूर एक्टर इरफ़ान खान ने हॉलीवुड में भी अपना धौंस जमाया है। काफी स्ट्रगल देखने के बाद उन्हें ‘सलाम बॉम्बे’ नाम की एक फिल्म मिली जिनमें उनका एक बहुत छोटा सा रोल था। अपने इस छोटे से किरदार से लोगों का ध्यान आकर्षित करने वाले इस एक्टर ने फिर कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा।
इसके बाद ‘द वारियर’, ‘मकबूल’, ‘हासिल’, ‘द नेमसेक’, ‘रोग’, ‘पान सिंह तोमर’, ‘द लंचबॉक्स’, ‘तलवार’, ‘लाइफ ऑफ पाई’, ‘मुंबई मेरी जान’, ‘साहेब बीवी और गैंगस्टर रिटर्नस’, ‘हिंदी मीडियम’ जैसी अनगिनत फिल्मों में काम कर इरफान ने दर्शकों के दिल में और इंडस्ट्री में अपनी एक खास जगह बना ली। साल 2011 में उन्हें भारत सरकार द्वारा पद्मश्री से भी सम्मानित किया गया।
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इरफान खान, राधिका मदान
- फोटो : सोशल मीडिया
इरफान हॉलीवुड में भी सक्रिय थे। उन्होंने 'स्पाइडर मैन', 'जुरासिक वर्ल्ड' और 'इन्फर्नो' जैसी फिल्मों में काम किया। हॉलीवुड अभिनेता टॉम हैंक्स ने उनकी सराहना करते हुए एक बार कहा था कि इरफान की आंखें भी अभिनय करती हैं। इरफान खान को फिल्म 'पान सिंह तोमर' के लिए साल 2013 में राष्ट्रीय पुरस्कार मिला था। आखिरी बार इरफान फिल्म 'अंग्रेजी मीडियम' में नजर आए थे।