हर साल की तरह एक बार फिर से भारत के लोग स्वतंत्रता दिवस को बड़े ही धूमधाम से मना रहे हैं। यह आजादी की 73वीं वर्षगाठ है। हर कोई स्वतंत्रता की इस रंग में रंगने को तैयार है। राष्ट्रगान के अलावा हर साल की तरह एक और गीत भारतवासियों के दिलों, दिमाग और जुबान पर छाया रहता है वह 'वंदेमातरम'। जी हां स्कूल, कॉलेज या फिर ऑफिस हर जगह इस गीत की धुन आपको कहीं न कहीं से सुनाई दे ही जाती है। समय के साथ इस गीत पर बॉलीवुड का फ्लेवर ऐसा चढ़ा कि लोग अपने आप को धीरे-धीरे उसी रंग में रंगना शुरू हो गए।
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मुख्य रूप से इस गीत को बंगाली भाषा में बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने लिखा जिसके बाद इसमें धीरे -धीरे बदलाव देखा गया। बदलाव की ये शुरुआत बॉलीवुड में भी समय के साथ देखी गई। सबसे पहले 'वंदे मातरम' गीत को साल 1952 में आई फिल्म 'आनंद मठ' में लता मंगेशकर ने गाया जिसकी धुन को एक नए धागे में हेमंत कुमार ने पिरोया।
इसके बाद सुरों की मलिका लता मंगेशकर ने साल 1998 में अपनी आवाज में एक बार फिर से इस गीत को नया आयाम दिया। उन्होंने इस गाने में कुछ लाइनों को जोड़ा और उसी धुन को अपनाते हुए गया।
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खास बात ये है कि इस गीत का खुमार लोगों के सिर पर ऐसे चढ़कर बोला कि हर नया वर्जन पहले गाने की तरह ही फेमस हुआ। साल दर साल इस गाने के बोल सहित आवाज और धुन में भले ही बदलाव होता गया लेकिन इस गाने में देशभक्ति का जोश कभी भी कम नहीं हुआ।
1951 से लेकर साल 2012 तक इस गाने की धुनों पर बॉलीवुड के कई गायकों का जादू चला जिसमें सोनू निगम, सुनिधि चौहान और शंकर महादेवन का नाम शामिल है लेकिन इन सबके ऊपर ए आर रहमान के 'मां तुझे सलाम गाने' ने सबके ऊपर कहीं न कहीं भारी पड़ा।
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