'बाबू मोशाय! जिंदगी बड़ी होनी चाहिए, लंबी नहीं...,' यह सदाबहार डायलॉग वर्ष 1971 की फिल्म 'आनंद' का है, जिसका निर्देशन ऋषिकेश मुखर्जी ने किया था। भारतीय सिनेमा के सर्वश्रेष्ठ निर्देशक ऋषिकेश ने भी अपनी जिंदगी को इस डायलॉग की तरह ही जीया निडर, बेबाक और बेमिसाल। अभिमान, गुड्डी, गोलमाल, नमक हलाल, चुपके-चुपके और अनुपमा जैसी क्लासिक फिल्में देने वाले ऋषिकेश ने कई संवेदनशील मुद्दों पर फिल्में बनाईं। हालांकि, वह सिनेमा जगत में एक तेज-तर्रार निर्देशक के रूप में प्रचलित थे। हर एक सीन को बारीकी से फिल्माना और कभी भी उसमें परिवर्तन कर देना ऋषिकेश की खासियत थी। वे दर्शकों को हंसाते-हंसाते जीवन के कड़वे सच से वाकिफ कराते थे। अपनी फिल्मों के जरिए लोगों को जीवन के प्रति सकारात्मक नजरियां देने वाले ऋषिकेश ने 27 अगस्त 2006 को अंतिम सांस लेकर दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया। हालांकि, वह अपने काम के जरिए आज भी अमर हैं। तो आइए इस दिग्गज निर्देशक की पुण्यतिथि पर इनके जीवन और करियर से जुड़े कुछ अहम पहलुओं पर गौर फरमा लेते हैं-
2 of 5
ऋषिकेश मुखर्जी
- फोटो : सोशल मीडिया
ऋषिकेश मुखर्जी किसी भी कलाकार को आगे शूट किए जाने वाले सीन की कोई जानकारी नहीं देते थे, बस सीन आने पर उससे जुड़ा कॉस्ट्यूम थमा देते थे। वहीं, उनके साथ फिल्म 'चुपके चुपके' में काम कर रहे अमिताभ बच्चन को इस बारे में कोई जानकारी नहीं थी। यही कारण रहा कि उन्हें ऋषि दा से ऐसी डांट पड़ी कि उनका मनोबल थोड़ी देर के लिए बुरी तरह डोल गया। दरअसल, एक सीन की दरकरार थी, जिसमें असरानी मुख्य किरदार में थे। शूट के दौरान असरानी को सूट पहनने के लिए दिया गया, जबकि धर्मेंद्र को ड्राइवर के कपड़े मिले। कॉस्ट्यूम लेकर धर्मेंद्र और असरानी दोनों असमंजस में थे, क्योंकि दोनों में से किसी को माजरा समझ नहीं आ रहा था, वहीं, ऋषि दा सेट पर आराम से चेस खेल रहे थे।
3 of 5
ऋषिकेश मुखर्जी
- फोटो : सोशल मीडिया
धर्मेंद्र की उत्सुकता बढ़ती चली गई, और उन्होंने आखिरकार असरानी से पूछ ही लिया, 'क्यों मैं तुम्हारा ड्राइवर बना हूं क्या ? क्या चल रहा है ? तुम्हें सूट और मुझे ड्राइवर के कपड़े क्यों?' इस पर असरानी ने जवाब दिया कि उन्हें इसके बारे में कुछ भी नहीं पता। वहीं, ऋषि दा दोनों की बातें बड़े ही गौर से सुन रहे थे। धर्मेंद्र को असरानी से इस तरह बात करता देख ऋषि दा ने चिल्लाते हुए कहा, 'ऐ धरम... असरानी से क्या पूछ रहे हो। सीन के बारे में पूछ रहे हो... अगर कहानी की इतनी ही समझ होती तो तुम आज हीरो होते।' ऋषि दा की डांट सुनकर धर्मेंद्र तुरंत चुप हो गए।
4 of 5
ऋषिकेश मुखर्जी-धर्मेंद्र
- फोटो : सोशल मीडिया
किस्सा तब और मजेदार हो गया जब अमिताभ बच्चन इस पूरे वाक्ये से पूरी तरह अनभिज्ञ थे, और उन्होंने असरानी से सूट वाला माजरा पूछते हुए कहा, 'तुम आज सूट में कैसे, किसका ऑफिस है ये सेट पर?' अमिताभ को धर्मेंद्र से भी बुरी तरह लताड़ पड़ी। ऋषि दा ने तिलमिलाते हुए कहा, 'ऐ अमित तुम क्या पूछ रहे हो सीन या कहानी ? ऐ धरम बताओ अमित को जो मैंने तुमसे कहा। तुम लोगों को अगर इतनी ही समझ होती तो आज तुम लोग फिल्म में हीरो नहीं होते, डायरेक्टर होते। चलो काम पर।' उस वक्त ऋषि दा की डांट भले ही कलाकारों के दिल पर लगी, लेकिन 'चुपके-चुपके' जब पर्दे पर रिलीज हुई, तो बॉक्स ऑफिस पर बंपर कमाई करने में सफल रही। साथ ही इसे क्लासिक हिट करार दिया गया।
5 of 5
ऋषिकेश मुखर्जी
- फोटो : सोशल मीडिया
ऋषिकेश मुखर्जी ने अपनी फिल्मों के माध्यम से एक कलाकार को स्टार फिर सुपरस्टार बनाया, जिनमें अमोल पालेकर, धर्मेंद्र, अमिताभ बच्चन जैसे नाम शामिल हैं। बेहतरीन काम के लिए वर्ष 2000 में ऋषि दा को दादा साहब फाल्के अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था। इसके बाद उन्हें छह वर्ष लगातार 1961, 1967, 1970, 1971, 1972, 1981 तक सर्वश्रेष्ठ फिल्म का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला। इतना ही नहीं उन्होंने सर्वश्रेष्ठ एडिटिंग, सर्वश्रेष्ठ कहानी और सर्वश्रेष्ठ स्क्रीनप्ले के लिए भी कई अवॉर्ड और सम्मान अपने नाम किए थे।