गिरीश कर्नाड किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। उनके जैसी बहुमुखी प्रतिभा की धनी शख्सियत कभी-कभी जन्म लेती हैं। गिरीश कर्नाड ने साहित्य से लेकर, नाटक और निर्देशन तक कई क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा को साबित किया। वह बड़े साहित्यकार, नाटककार, अभिनेता, फिल्म निर्देशक और प्ले राइटर थे। वह उन कुछ चुनिंदा लोगों में से थे, जिन्होंने साहित्य के साथ अभिनय और निर्देशन की दुनिया में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। आज गिरीश कर्नाड का जन्मदिन है। गिरीश कर्नाड का जन्म 19 मई 1938 को महाराष्ट्र के माथेरान में हुआ। वहां से निकलकर उन्होंने जितना नाम कमाया, वह कुछ ही लोगों को नसीब होता है।
{"_id":"6285023a16e26b55434caf63","slug":"he-was-a-great-actor-film-director-kannada-writer-and-play-writer-who-got-many-awards-and-honours","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"Girish Karnad: साहित्य, नाटक और फिल्म जगत की बड़ी हस्ती कर्नाड बनना चाहते थे कवि, इस विचार ने बदली जिंदगी","category":{"title":"Bollywood","title_hn":"बॉलीवुड","slug":"bollywood"}}
Girish Karnad: साहित्य, नाटक और फिल्म जगत की बड़ी हस्ती कर्नाड बनना चाहते थे कवि, इस विचार ने बदली जिंदगी
Thu, 19 May 2022 08:44 AM IST
ज्योति राघव
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
Published by: ज्योति राघव
Updated Thu, 19 May 2022 08:44 AM IST
सार
विज्ञापन
गिरीश कर्नाड
गिरीश कर्नाड
- फोटो : सोशल मीडिया
इतिहास से जोड़कर समकालीन मुद्दों पर लिखा
कर्नाड ने करीब चार दशकों तक प्ले लिखे। उन्होंने इतिहास औ पौराणिक कथाओं का इस्तेमाल करते हुए समकालीन मुद्दों पर नाटकों की रचना की। उन्होंने अपने प्ले का अंग्रेजी अनुवाद किया। इसके लिए उन्हें खूब वाहवाही मिली। उनके नाटकों का अनुवाद कई भारतीय भाषाओं में किया गया। उनके नाटक इब्राहिम अलकाजी, बी वी कारंत, एलिक पदमसी, अरविंद गौर, सत्यदेव दुबे, विजया मेहता, श्यामानंद जालान और अमल अल्लाना जैसे निर्देशकों द्वारा निर्देशित किए गए।
कर्नाड ने करीब चार दशकों तक प्ले लिखे। उन्होंने इतिहास औ पौराणिक कथाओं का इस्तेमाल करते हुए समकालीन मुद्दों पर नाटकों की रचना की। उन्होंने अपने प्ले का अंग्रेजी अनुवाद किया। इसके लिए उन्हें खूब वाहवाही मिली। उनके नाटकों का अनुवाद कई भारतीय भाषाओं में किया गया। उनके नाटक इब्राहिम अलकाजी, बी वी कारंत, एलिक पदमसी, अरविंद गौर, सत्यदेव दुबे, विजया मेहता, श्यामानंद जालान और अमल अल्लाना जैसे निर्देशकों द्वारा निर्देशित किए गए।
गिरीश कर्नाड
- फोटो : Instagram
नाटक लिखने का नहीं था इरादा
गिरीश कर्नाड ने कन्नड़, तमिल, तेलुगू, मलयालम के अलावा हिंदी और मराठी सिनेमा में भी उत्कृष्ट अभिनय किया। उनकी शुरुआती पढ़ाई मराठी में हुई। गिरीश कर्नाड ने 1958 में कर्नाटक आर्ट्स कॉलेज से अपना ग्रेजुएशन किया। वे कहते थे मैं कवि बनना चाहता था, लेकिन मेरी थिएटर में भी रुचि थी, मेरा नाटक लेखक बनने का कोई इरादा नहीं था। स्कॉलरशिप मिलने के बाद मैं लंदन पहुंचा। उस समय एक धारणा थी कि यदि मैं विदेश जाऊंगा, तो मैं विदेश की किसी गोरी मेम से शादी कर लूंगा। तभी एक दिन मेरे मन में ययाति लिखने का विचार आया। इसके बाद जिंदगी में कई मोड़ आए। उनके लिखे नाटकों में 'ययाति', 'तुगलक', 'हयवदन', 'अंजु मल्लिगे', 'अग्निमतु माले', 'नागमंडल' और 'अग्नि और बरखा' काफी प्रसिद्ध रहे हैं।
गिरीश कर्नाड ने कन्नड़, तमिल, तेलुगू, मलयालम के अलावा हिंदी और मराठी सिनेमा में भी उत्कृष्ट अभिनय किया। उनकी शुरुआती पढ़ाई मराठी में हुई। गिरीश कर्नाड ने 1958 में कर्नाटक आर्ट्स कॉलेज से अपना ग्रेजुएशन किया। वे कहते थे मैं कवि बनना चाहता था, लेकिन मेरी थिएटर में भी रुचि थी, मेरा नाटक लेखक बनने का कोई इरादा नहीं था। स्कॉलरशिप मिलने के बाद मैं लंदन पहुंचा। उस समय एक धारणा थी कि यदि मैं विदेश जाऊंगा, तो मैं विदेश की किसी गोरी मेम से शादी कर लूंगा। तभी एक दिन मेरे मन में ययाति लिखने का विचार आया। इसके बाद जिंदगी में कई मोड़ आए। उनके लिखे नाटकों में 'ययाति', 'तुगलक', 'हयवदन', 'अंजु मल्लिगे', 'अग्निमतु माले', 'नागमंडल' और 'अग्नि और बरखा' काफी प्रसिद्ध रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
गिरीश कर्नाड
- फोटो : सोशल मीडिया
90 से ज्यादा फिल्मों में काम किया
गिरीश कर्नाड ने हिंदी फिल्मों में भी अपना हाथ अजमाया और इसमें भी सफलता पाई। 48 साल के अपने फिल्मी करियर में गिरीश कर्नाड ने 90 से ज्यादा फिल्मों में काम किया। हिंदी में उन्होंने 'निशांत', 'मंथन' और 'पुकार' जैसी फिल्में कीं। इसके अलावा सलमान खान के साथ वो 'एक था टाइगर' और 'टाइगर जिंदा है' में भी दिखाई दिए थे, यही उनकी आखिरी हिंदी फिल्म भी थी। उनकी आखिरी फिल्म कन्नड़ भाषा में बनी 'अपना देश' थी।
विज्ञापन
गिरीश कर्नाड
- फोटो : सोशल मीडिया
सामाजिक आंदोलनों में रही भूमिका
गिरीश कर्नाड की लेखनी में जितना दम था, उन्होंने उतने ही बेबाक अंदाज में अपनी आवाज को बुलंदी दी। उनकी तमाम राजनीतिक और सामाजिक आंदोलनों में सक्रिय भूमिका रही। वह सामाजिक रूप से काफी सक्रिय रहते थे।
गिरीश कर्नाड की लेखनी में जितना दम था, उन्होंने उतने ही बेबाक अंदाज में अपनी आवाज को बुलंदी दी। उनकी तमाम राजनीतिक और सामाजिक आंदोलनों में सक्रिय भूमिका रही। वह सामाजिक रूप से काफी सक्रिय रहते थे।