आज मलयालम फिल्मों के अभिनेता ममूटी (mammootty) का जन्मदिन है। अपने 25 सालों से भी अधिक के करियर के दौरान, उन्होंने शीर्ष अभिनेता के रूप में 380 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया है। 7 सितंबर 1951 को जन्मे ममूटी को साल 1998 में पद्म श्री से सम्मानित किया जा चुका है। ममूटी के पास एक साल में 35 फिल्में करने का रिकॉर्ड है। ममूटी के जन्मदिन पर आइए आपको बताते हैं कुछ रोचक बातें।
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Mammootty
- फोटो : Amar Ujala, Mumbai
ममूटी ने अपने करियर में 380 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया है। इसके अलावा उन्हें मलयालम फिल्मों में डबल रोल के लिए भी जाना जाता है। ममूटी ने करीब नौ फिल्मों में डबल रोल किए हैं। साउथ इंडस्ट्री के दो बड़े स्टार्स माने जाने वाले ममूटी और कमल हासन ने कभी एक साथ फिल्मों में काम नहीं किया है। ममूटी एकमात्र मलयालम अभिनेता हैं जिन्हें 3 बार राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। पेशे से ममूटी एक्टर होने के साथ-साथ एक वकील भी हैं।
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Mammootty 369 cars collection
- फोटो : सांकेतिक
ममूटी ने कुछ गैर मलयालम फिल्मों में भी अभिनय किया है। इनमें तमिल, तेलुगु, हिंदी और अंग्रेजी फिल्में शामिल हैं। ममूटी को कारों का भी शौक है। उनके पास 15-20 नहीं बल्कि 369 कारों का कलेक्शन है। उनकी कई कारों का नंबर 369 है। इसमें सस्ती से सस्ती और महंगी से महंगी कारें शामिल हैं। ममूटी ने अपनी कारों के लिए अलग से गैराज बनवाया है। ममूटी ज्यादातर खुद ही कार ड्राइव करना पसंद करते हैं।
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Mammootty
- फोटो : Social Media
साल 2015 में साउथ के मेगा स्टार ममूटी को एक 'फेयरनेस साबुन' के चलते एक शख्स ने कोर्ट में घसीटा गया था। दरअसल एक 'फेयरनेस साबुन' का विज्ञापन ममूटी ने काम किया था। इस साबुन का इस्तेमाल करने और निराशाजनक नतीजे सामने आने के बाद एक आर्टिस्ट ने उनपर केस ठोक दिया था। आर्टिस्ट ने कहा था- मैंने करीब 1 साल तक इंदुलेखा साबुन का इस्तेमाल किया लेकिन गोरा नहीं हुआ।
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Mamangam
- फोटो : Amar Ujala, Mumbai
अमर उजाला को दिए इंटरव्यू में ममूटी ने अपने फिल्मी करियर को लेकर कहा था कहा था- जब मैं सिनेमा में नया नया आया था मुझे जो काम मिल जाता था, मैं कर लेता था। कभी हीरो, कभी सेकेंड हीरो तो कभी बस एक या दो दिन का रोल। मैंने काम को मना नहीं किया। मैं बस एक अभिनेता के तौर पर याद किया जाना पसंद करूंगा। एक अच्छा इंसान बनने की मैंने कोशिश की है। कहते हैं कि इंसान होना आसान है, इंसान बने रहना मुश्किल है। एक इंसान को अपने आसपास की हर चीज की कद्र करनी चाहिए फिर चाहे वह जंगल हो, नदी हो, पहाड़ हों, खेत हों या आसपास की निर्जीव वस्तुएं।