टीवी पर भगवान राम बनकर मशहूर हुए अरुण गोविल का आज जन्मदिन है। उनका जन्म 12 जनवरी 1958 को उत्तरप्रदेश के मेरठ में हुआ था। उन्होंने मेरठ यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की और 17 साल की उम्र में बिजनेस के सिलसिले में मुंबई आ गए यहां आकर उनके मन में अभिनय का जोश जागा और वे अभिनेता बन गए। शुरुआती दौर में उन्होंने कई फिल्मों में साइड हीरो का किरदार निभाया। अरुण गोविल ने कई भाषाओं की फिल्मों में काम किया है।
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arun govil, sridevi
- फोटो : social media
उन्होंने अपने बॉलीवुड करियर की शुरुआत 1977 में आई फिल्म पहेली से की। अरुण गोविल के जन्मदिन पर आइए आपको बताते हैं कैसे मिला उन्हें राम का अमर किरदार। राजश्री प्रोडक्शन हाउस ने 'सावन को आने दो' में पहली बार अरुण गोविल को ब्रेक दिया।'' ये फिल्म बेहद कामयाब रही लेकिन लोकप्रियता उन्हें धारावाहिक 'विक्रम और बेताल' में महाराज विक्रमादित्य के किरदार से मिली। ये धारावाहिक दूरदर्शन पर प्रसारित किया जाता था।
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अरुण गोविल
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इस सीरियल के बाद रामानंद सागर हिंदू पौराणिक कथा 'रामायण' लेकर आए। इसमें अरुण गोविल को ही उन्होंने राम के किरदार के लिए चुना। उन दिनों अरुण चेन स्मोकर थे लेकिन इस किरदार के लिए उन्हें सिगरेट छोड़नी पड़ी। रामानंद सागर का मानना था कि भगवान राम में किसी तरह के अवगुण नहीं थे ऐसे में उनका किरदार निभाने वाला शख्स भी ऐसा ही होना चाहिए।
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अरुण गोविल
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राम का किरदार करने के बाद अरुण गोविल की जिंदगी बदल गई। लोग सार्वजनिक जगहों पर अरुण को देखते तो उनके पांव छूने लगते और आशीर्वाद मांगते। उनकी तस्वीर के सामने लोग अगरबत्ती जलाते थे। अरुण जब अपने परिवार के साथ घूमने जाते तो लोग वहां भी उनके पीछे-पीछे पहुंच जाते। लोग अपने बीमार बच्चों को डॉक्टर के पास न लेकर उनके पास लाते थे।
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अरुण गोविल
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रामायण के अलावा अरुण ने 'इतनी सी बात' 'श्रद्धांजलि' 'जियो तो ऐसे जियो' 'सावन को आने दो' जैसी कई फिल्मों में भी काम किया है। राम का किरदार कर दर्शकों के दिल में राम बनकर बस जाने वाले अरुण ने अब खुद को अभिनय से दूर कर लिया है। हालांकि वे ट्विटर के माध्यम से फैंस के साथ जुड़े रहते हैं।