पर्दे पर जिस वक्त नरगिस, मधुबाला, नलिनी जैसी अभिनेत्रियों का ही जलवा बरकरार था उस वक्त गीता बाली अपनी शोख अदाओं के साथ दर्शकों के सामने आईं और लोगो को अपना दीवाना बना दिया। गीता बाली ने 50 और 60 के दशक में कई शानदार फिल्मों में काम किया था। उनकी एक्टिंग लोगों का उनका फैन बना देती थी। वहीं उनकी खूबसूरती के भी लोग घायल हो जाते थे। फिल्मों के साथ-साथ शम्मी कपूर से हुए प्यार और शादी को लेकर भी गीता बाली काफी चर्चा में रही। 21 जनवरी 1965 को गीता का 35 वर्ष की उम्र में निधन हो गया था। उनकी डेथ एनिवर्सिरी के मौके पर जानते हैं उनकी और शम्मी कपूर की प्रेम कहानी के बारे में।
शम्मी कपूर की बायोग्राफी 'शम्मी कपूरः द गेम चेंजर' के मुताबिक दोनो की पहली मुलाकात 1955 में 'मिस कोका कोला' के दौरान हुई थी। इसके बाद दोनों रानीखेत में केदार शर्मा की फिल्म 'रंगीन रातें' के सेट पर मिले थे। इस फिल्म में शम्मी कपूर तो मुख्य भूमिका में थे, लेकिन गीता ने फिल्म में कैमियो रोल किया था। हालांकि फिल्म में गीता का जरा सा होना ही शम्मी के लिए काफी हो गया था। इस दौरान ही दोनों का प्यार परवान चढ़ा था।
उस दौर में जब गीता और शम्मी को प्यार हुआ तो गीता एक सुपरस्टार बन चुकी थीं, लेकिन शम्मी स्ट्रगल कर रहे थे। गीता उम्र में शम्मी से एक साल बड़ी थीं, इसलिए शम्मी शादी को लेकर असमंजस में थे। गीता भी नहीं चाहती थीं कि उनके प्यार की वजह से शम्मी कपूर या उनके परिवार का दिल दुखे।
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शम्मी कपूर, गीता बाली
- फोटो : Social Media
हालांकि शम्मी गीता के प्यार में दीवाने हो गए थे इसलिए दोनों ने शादी का मन बना लिया। एक्टर ने अपनी किताब के बारे में बात करते हुए खुलासा किया था कि उन्होंने गीता से मंदिर में शादी की थी। इस शादी में उनके परिवार का कोई भी सदस्य शामिल नहीं हुआ था। शम्मी कपूर ने बताया था कि, 'गीता उनसे एक साल बड़ी थी। 'आनंद मैथ' में उन्होंने मेरे पिता पृथ्वीराजकपूर के साथ काम किया था। उन्होंने मेरे भाई के साथ काम किया था। मुझे नहीं पता था कि मेरे परिवार वाले कैसी प्रतिक्रिया देंगे, लेकिन मैंने सोच लिया था कि गीता ही वो महिला हैं जिनके साथ मुझे शादी करनी है'।
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शम्मी कपूर, गीता बाली
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शम्मी ने आगे बताया था कि, 'गीता ने मुझसे आई लव यू कहा था लेकिन शादी के लिए भी तुरंत मना कर दिया था। फिर चार महीने की तड़प, आंसू , विनती , अलगाव और हताशा के बाद एक दिन हम 23 अगस्त 1955 को जुहू होटल बॉम्बे में थे जब मैंने गीता को प्रपोज कर दिया और उन्होंने फौरन शादी के लिए हां कह दी। हमारी शादी में सिर्फ पुजारी थे जिन्होंने पूरे रीति रिवाज से हमारी शादी करवाई थी। हालांकि मांग भरने के लिए हमारे पास सिंदूर नहीं था, फिर गीता ने पर्स से अपनी लिपस्टिक निकाली और मैंने लिपस्टिक से ही गीता की मांग भर दी।