आलिया भट्ट-स्टारर गंगूबाई काठियावाड़ी 25 फरवरी को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है। बर्लिन फिल्म फेस्टिवल में प्रीमियर हुई इस फिल्म को समीक्षकों और दर्शकों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है। बता दें कि यह फिल्म हुसैन जैदी की किताब माफिया क्वींस ऑफ मुंबई के अध्यायों का रूपांतरण है और इसमें आलिया मुख्य भूमिका में हैं। फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे एक देह व्यापार के लिए मजबूर युवती मुंबई के कमाठीपुरा रेड-लाइट एरिया की प्रमुख और प्रसिद्ध व्यक्ति बन जाती है।
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गंगूबाई काठियावाड़ी
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
द गार्जियन ने फिल्म की समीक्षा में लिखा, "जब गंगूबाई अंततः एक माफिया रानी से एक माता का रूप धारण करती है, तब फिल्म थोड़ी सी बोरिंग होने लगती है। लेकिन इस फिल्म में भयानक उत्साह और दुस्साहस है। कुछ शानदार फैंटसी-म्यूजिकल सेटपीस हैं। इस फिल्म में दिखाई गई भीषणता आपको भावुक कर देगी। कुल मिलाकर यह एक मनोरंजक फिल्म है, जिसमें कई बोल्ड सीन्स के साथ कई बोल्ड कदम उठाए गए हैं।”
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गंगूबाई काठियावाड़ी
- फोटो : सोशल मीडिया
लेटरबॉक्सडी द्वारा साझा की गई स्वतंत्र आलोचक एलिसिया हैडिक की समीक्षा में कहा गया है कि एक विशेष गाला के रूप में प्रदर्शित की गई बड़े बजट की भारतीय ब्लॉकबस्टर फिल्म आश्चर्यजनक रूप से मनोरंजक बायोपिक साबित हुई। इस फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे एक युवती, जिसे वेश्यावृत्ति में धकेल दिया था, ने एक नेता तक का सफर तय किया और देश में वेश्यावृत्ति को वैध बनाने वाला पहला कानून लाने में मदद की। इस फिल्म की सबसे प्रभावशाली बात यह है कि निर्देशक ने बड़ी ही गंभीरता से उस मुद्दे को उठाया है जिसे शायद ही कभी इस तरह की बिग बजट फिल्मों में दिखाया गया हो।"
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गंगूबाई काठियावाड़ी
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
मूवीपायलट की एक समीक्षा, जिसका जर्मन से हिंदी में अनुवाद किया गया है, में लिखा है: "निर्देशक संजय लीला भंसाली रोमांचकारी अंडरवर्ल्ड ड्रामा बनाते हैं, जिसमें बहुता सारे पंच हैं।"
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गंगूबाई काठियावाड़ी टीजर
- फोटो : फिल्म टीजर
सिनेमैजिकॉन पर लिडा बाख द्वारा साझा की गई एक समीक्षा में, फिल्म को 'सर्वथा क्रांतिकारी' कहा गया। "अपनी उत्साही और उज्ज्वल रूप से सुंदर नायिका, दशकों तक फैली कहानी और रोमांच, संगीत, महाकाव्य नाटक और रोमांस के क्लासिक मिश्रण के साथ, संजय लीला भंसाली की बायोपिक क्लासिक फिल्म के रूप में दिखाई देती है। जिसने बर्लिन फिल्म फेस्टिवल में चार-चांद लगा दिए।मुख्य किरदार को सेक्स वर्क के रूप में दिखाना जिसका जन्म गंगूबाई हरजीवनदास के नाम से हुआ था और उनके जीवन की घटनाओं पर फिल्म बनाना, सर्वथा क्रांतिकारी है।”